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फूलों की खेती किसानों की आय बढ़ाने में सहायक

पटना। जलवायु परिवर्तन को देखते हुए फूलों की खेती किसानों की आमदनी बढ़ाने में सहायक हो सकती है। जिस अनुपात में राज्य में फूलों की मांग बढ़ी है, उस अनुपात में उत्पादन नहीं बढ़ा है। आज भी बिहार में खपत का 90 प्रतिशत फूल कोलकाता, बेंगलुरु एवं पूणे से मंगाया जा रहा है। इस कारण राज्य में फूल की व्यावसायिक खेती की अपार संभावना है। कृषि मंत्री डाॅ प्रेम कुमार ने राज्यस्तरीय पुष्प प्रदर्शनी के उद्घाटन के दौरान ये बातें कहीं। दो दिवसीय (7-8 फरवरी) प्रदर्शनी का आयोजन बिहार बागवानी विकास सोसाईटी ने ज्ञान भवन में किया है।  

उन्होंने कहा कि बिहार में फूलों की खेती लगभग 862 हेक्टेयर में हो रही है और उत्पादन करीब 10.70 हजार मीट्रिक टन है। खेती का क्षेत्रफल 2005-06 की तुलना में लगभग नौ गुना बढ़ा है। किसानों की आय को दोगुना करना सरकार की प्राथमिकता है। राज्य सरकार पुष्प उत्पादन के क्षेत्र में किसानों के प्रशिक्षण, उच्च तकनीकी का समावेशन, क्षेत्र विस्तार, संगठित बाजार एवं मांग के अनुरूप फूल के उत्पादन को प्रोत्साहित कर रही है। 

कृषि मंत्री ने कहा कि यदि 4000 वर्गमीटर क्षेत्रफल में पाॅली हाऊस बनाकर जरबेरा या डच रोज फूल की खेती की जाये, तो तीन साल में 20-25 लाख रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त किया जा सकता है। यह रिपोर्ट कृषि वैज्ञानिकों  की है। बिहार की मिट्टी गेंदा, जरबेरा, डच रोज, गुलदाऊदी, ग्लैडियोलस एवं रजनीगंधा फूलों की खेती के लिए उपयुक्त है। सरकार लागत मूल्य का लगभग 50 प्रतिशत तक अनुदान दे रही  है। 

कृषि सचिव डाॅ एन सरवण कुमार ने कहा कि पुष्प महोत्सव अब प्रत्येक वर्ष आयोजित किया जायेगा। अगले साल इसे बड़े पैमाने पर आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। पहले जिला स्तर पर उसके बाद प्रमंडलीय स्तर पर और प्रमंडलीय स्तर पर चुने गये प्रतिभागियों को राज्य स्तर पर आमंत्रित किया जायेगा। इस तरह के आयोजन से फूल उत्पादक किसानों को सरकार की योजनाओं से प्रोत्साहन मिलेगा। 

इस अवसर पर आईएआरआई दिल्ली के डीन डाॅ एसएस संधु, पशुपालन निदेशक विनोद सिंह गुंजियाल, उद्यान निदेशक नंद किशोर समेत फूल उत्पादक मौजूद थे। 


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