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शराबबंदी से राजस्व पर कोई प्रभाव नहीं, पूरे देश में लागू हो 

नई दिल्ली। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि बिहार मद्य निषेध अभियान के लिए पूरे देश में रोल माॅडल है। शराबबंदी से राजस्व पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। सरकार लगभग पांच हजार करोड़ रुपये के वार्षिक राजस्व से वंचित हुई, लेकिन इसकी दोगुनी राशि दस हजार करोड़ रुपये उन परिवारों की बची, जो इसे शराब पर खर्च कर देते थे। 

उन्होंने कहा कि अब वे इस राशि को अपने परिवार के लिए जरूरत के सामान एवं सेवाओं पर खर्च करते हैं। यह राशि भी अर्थव्यवस्था में ही आती है। अगर स्थानीय बाजार की अर्थव्यवस्था मजबूत होती है, तो सरकार के राजस्व में स्वाभाविक रूप से वृद्धि होगी। साथ ही इसका अप्रत्यक्ष लाभ सामाजिक लाभांश के रूप में अगली पीढ़ी को मिलेगा। 

सीएम ने कहा कि पूरे देश में शराबबंदी होनी चाहिए। यह सामाजिक, धार्मिक एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी आवश्यक है। वे नई दिल्ली में शराब मुक्त भारत पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। सम्मेलन का आयोजन इस्ट ऑफ कैलाश के इस्काॅन सभागार में मिलित ओडिसा निशा निवारण अभियान (मोना) ने किया था। कार्यक्रम से पहले मुख्यमंत्री ने इस्काॅन मंदिर में पूजा की। 

सीएम ने बताया कि 9 जुलाई, 2015 को पटना में आयोजित ग्राम वार्ता कार्यक्रम के दौरान स्वयं सहायता समूह की कुछ महिलाओं ने बिहार में शराबबंदी की मांग उठाई। उनकी मांग सुनकर तुरंत मैंने कहा कि अगर चुनाव के बाद सरकार में आये, तो राज्य में शराबबंदी लागू करेंगे। नई सरकार गठन के बाद एक अप्रैल, 2016 से शराबबंदी लागू करने की व्यवस्था की गई। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में बिहार ने दो अंकों की आर्थिक विकास दर हासिल की है। राज्य में प्रति व्यक्ति आय में गुणात्मक वृद्धि हुई है। राज्य के ग्रामीणों की आय में भी वृद्धि हुई है, लेकिन देखा गया कि ग्रामीण इलाकों के गरीब लोग अपनी आय का बड़ा हिस्सा शराब पर खर्च कर देते थे। 

इसका सबसे बुरा प्रभाव निर्धन लोगों के स्वास्थ्य एवं उनके आर्थिक स्थिति, खान-पान, घरेलू शांति एवं महिलाओं के सम्मान पर पड़ता था। यहां तक कि युवा भी शराब के आदी होते जा रहे थे। ग्रामीण इलाकों की महिलाओं ने अपने स्तर पर शराब के विरुद्ध आवाज उठाई और इस पर रोक लगाने की मांग की। 

सीएम ने कहा कि राज्य में शराबबंदी के सफल क्रियान्वयन के बाद लोगों को नशे की लत को छुड़ाने का इंतजाम किया जाय। जिलों में नशामुक्ति केंद्र खोले गये। 9 अप्रैल, 2016 को सर्वदलीय बैठक में हमने निर्णय लिया कि 2017 में मनाया जाने वाला चंपारण सत्याग्रह शताब्दी समारोह शराबबंदी और दलित उत्थान को समर्पित होगा।

राष्ट्र पिता महात्मा गांधी ने हमेशा शराब का विरोध किया। उनका कहना था कि शराब आदमियों से न सिर्फ उनका पैसा छीन लेती है, बल्कि उनकी बुद्धि भी हर लेती है। बापू ने कहा था कि यदि मुझे एक घंटे के लिए भारत का तानाशाह बना दिया जाये, तो मैं सबसे पहले शराब की सभी दुकानों को बिना क्षतिपूर्ति के बंद करा दूंगा। सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने आदेश में कहा है कि शराब और मौलिक अधिकार साथ-साथ नहीं चलते।

मुख्यमंत्री ने बताया कि मद्यनिषेध कानून में शिथिलता बरतने वाले पुलिस एवं उत्पाद विभाग के पदाधिकारी एवं कर्मियों पर भी कार्रवाई की गई है। अब तक 418 पुलिस पदाधिकारी एवं कर्मियों के विरुद्ध निलंबन एवं विभागीय कार्यवाही की गई है। 71 पुलिस कर्मियों को बर्खास्त किया गया है एवं 53 थानाध्यक्षों को दस वर्षों तक थानाध्यक्ष से वंचित किया गया है। 

कार्यक्रम को राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, मिलित ओडिसा निशा निवारण अभियान के पद्म चरण नायक, प्रख्यात गांधीवादी राधा भट्ट, मोना की सदस्य बनी दास, इस्काॅन के उप सभापति स्वामी ब्रजेन्द्र नारायण दास, वरिष्ठ अधिवक्ता अदिश अग्रवाल, संतोषानंद एवं पूजा छाबड़ा ने भी संबोधित किया।


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