पटना। बिहार चैंबर ऑफ काॅमर्स और बिहार उद्योग संघ (बीआईए) ने बिहार बजट की सराहना की है। वित्त मंत्री के साथ बजट पूर्व बैठक में दिये गये सुझावों को शामिल नहीं किये जाने पर चैंबर ने कहा कि इन्हें भी बजट में जगह मिलनी चाहिए थी।
चैंबर अध्यक्ष पीके अग्रवाल ने बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में बजट में करीब छह प्रतिशत की वृद्धि की गई है। इससे राज्य के विकास कार्यों को गति मिलेगी। साथ ही राज्य के सर्वांगीण विकास के लिए सात निश्चयों को कार्यान्वित कराने में भी बजट कारगर सिद्ध होगा।
अध्यक्ष ने कहा कि बजट पूर्व बैठक में राज्य सरकार से मांग की गयी थी कि उद्योग विभाग का बजट 2000 करोड़ किया जाये। औद्योगिक विकास निधि का गठन, लैंड बैंक बनाने एवं बैंकों पर राज्य में ऋण प्रवाह को बढ़ाने का दबाव बनाने का सुझाव दिया गया था। यह भी मांग की गयी थी कि राज्य में लागू बिजली की दरें पड़ोसी राज्य झारखंड एवं पश्चिम बंगाल के समतुल्य किया जाये या राज्य में स्थित उद्योगों को सब्सिडी मिले।

बीआईए : बिहार उद्योग संघ ने राज्य सरकार के वित्तीय प्रबंधन एवं नीतियों की सराहना की है। अध्यक्ष राम लाल खेतान ने कहा है कि राज्य के बजट आकार में लगातार वृद्धि हो रही है। वित्तीय वर्ष 2020-21 के बजट में 1,05,262.34 करोड़ रुपया स्कीम मद में व्यय होना अनुमानित है। स्कीम मद में व्यय होने से राज्य के आर्थिक विकास को बल मिलता है। रोजगार के नये अवसर सृजित होंगे। जनता की क्रय शक्ति बढ़ने से उद्योगों को भी फायदा होने की संभावना बनेगी।
बीआईए के उपाध्यक्ष संजय भरतिया ने कहा कि उद्योग विभाग का बजट काफी कम है। यह चिंतनीय है। उद्योग के माध्यम से ही स्थायी रोजगार का सृजन एवं सरकार को राजस्व मिलता है। हमें उम्मीद है कि सरकार आवश्यकता पड़ने पर अनुपूरक मांग के जरिये उद्योग विभाग को राशि उपलब्ध करायेगी।