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बीआरजीएफ की 911.82 करोड़ राशि जारी करने की मांग

भुवनेश्वर। पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि (बीआरजीएफ) के तहत बिहार की बची राशि 911.82 करोड़ केंद्र शीघ्र जारी करे। बिहार में आधारभूत संरचना की कमी को देखते हुए केंद्र सरकार ने 12वीं पंचवर्षीय योजना में बीआरजीएफ के तहत 12000 करोड़ रुपये की स्वीकृत दी थी। भुवनेश्वर में आयोजित पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक की अध्यक्षता गृहमंत्री अमित शाह ने की। बैठक में बिहार, झारखंड, ओडिसा एवं पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री मौजूद थे।  

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि यह बैठक हमें अपनी समस्याओं को एक मंच पर विमर्श करने और उनका निराकरण खोजने का अवसर देती है। पूर्वी क्षेत्र के राज्यों का इतिहास गौरवशाली रहा है। हमारी संस्कृति और विरासत एक जैसी है। समस्याएं भी समान हैं और हमें साथ मिलकर उनका हल निकालना है।

विशेष राज्य दर्जा की मांग : सीएम ने बैठक में बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने पर फिर से जोर दिया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में दोहरे अंक की विकास दर हासिल करने के बावजूद बिहार गरीबी रेखा, प्रति व्यक्ति आय, औद्योगीकरण, सामाजिक एवं भौतिक आधारभूत संरचना में राष्ट्रीय औसत से नीचे है। पिछडे़ राज्यों को मुख्य धारा में लाने के लिए नई सोच के तहत आवश्यक नीतिगत ढांचा तैयार करने की जरूरत है।

राष्ट्रीय गाद प्रबंधन नीति : गंगा की अविरलता को बरकरार रखने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक व्यापक गाद प्रबंधन नीति की जरूरत है। फरक्का बराज के अपस्ट्रीम में गाद प्रबंधन एवं डाऊनस्ट्रीम में क्षरण की समस्या का निदान होना आवश्यक है। इसके लिए फरक्का बराज में संरचनात्मक बदलाव या इसके हटाने के विकल्प पर विचार करना जरूरी है। दिसंबर, 2017 में केंद्र सरकार ने सेडिमेंट पाॅलिसी बनायी है। यह मुख्य रूप से गंगा में परिवहन की आवश्यकता को देखते हुए गाद हटाने पर केंद्रित है। यह नीति बिहार की विशिष्ट आवश्यकता के अनुरूप नहीं है।
 
कृषि : ब्रिंगिंग ग्रीन रेवोलुशन इन इस्टर्न इंडिया योजना के तहत बिहार को प्रति वर्ष एक हजार करोड़ रुपये देने की मांग सीएम ने की। वर्ष 2019-20 में इस योजना के तहत बिहार को मात्र 52 करोड़ रुपये एवं सभी पूर्वी राज्यों को मिलाकर 414 करोड़ रुपये प्राप्त हुआ। यह राशि क्षेत्र की आवश्यकताओं को देखते हुए अपर्याप्त है। डाॅ एमएस स्वामीनाथन की अध्यक्षता में गठित राष्ट्रीय किसान आयोग ने 2004 में ही पूर्वी राज्यों में कृषि के त्वरित विकास की आवश्यकता पर जोर दिया था। 

फसल अवशेष प्रबंधन के लिए पंजाब एवं हरियाणा की तरह बिहार को भी इस पैकेज में शामिल करने और इसके लिए बिहार को 200 करोड़ रुपये उपलब्ध कराने पर जोर दिया। 

जल संसाधन : सीएम ने कहा कि जून 2016 में रांची में हुई 22वीं बैठक में मैंने पश्चिम बंगाल से संबंधित महानंदा सिंचाई परियोजना, झारखंड से संबंधित तिलैया ढाढ़र योजना, उत्तर कोयल जलाशय योजना, बटाने जलाशय योजना एवं धनारजै जलाशय योजना के मुद्दे को उठाया था। प्रधानमंत्री कार्यालय कीे पहल पर वर्षों से अवरुद्ध उत्तर कोयल जलाशय योजना पर कार्य शुरू हुआ है, लेकिन अन्य योजनाओं का निराकरण अबतक नहीं हो सका है।

मुख्यमंत्री ने अन्य मुद्दों को भी बैठक में रखा। जिनमें झारखंड से पेंशन आदेयता, आंतरिक सुरक्षा एवं उग्रवाद नियंत्रण के लिए केंद्रांश हैं।  
 


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