पटना/नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि हमारा केंद्र से आग्रह होगा कि फिस्कल डेफिसिट (राजकोषीय घाटा) की सीमा बढ़ाई जाये। इसे तीन से बढ़ाकर चार या अधिक किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि एफआरबीएम एक्ट के अनुसार फिस्कल डेफिसिट की सीमा तीन प्रतिशत है। 2009-10 के वित्तीय संकट एवं 2010-11 में भी इसे बढ़ाया गया था। भारत में कोरोना वायरस पर नियंत्रण के लिए प्रधानमंत्री के नेतृत्व में जिस तरह सभी राज्यों ने काम किया है। हमें उम्मीद है कि शीघ्र हम इससे मुक्ति पा लेंगे। कोरोना के उन्मूलन के लिए बिहार ने कोरोना उन्मूलन कोष का गठन किया है।
वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग में कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए केंद्र एवं राज्य सरकारों के उपाय एवं आगे की रणनीति पर विस्तृत चर्चा हुई।
दवा और इक्विपमेंट की उपलब्धता पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि लेबोरेट्री टेस्ट को प्रभावी बनाने के लिए भारत सरकार अधिकृत टेस्टिंग किट्स और अन्य सामान एक सेट में दे। इससे जांच का परिणाम अच्छा आयेगा।
साथ ही कोविड-19 की रोकथाम और उपचार के लिए एन 95 मास्क, पीपीइ किट एवं वेंटिलेटर की भी व्यवस्था होनी चाहिए। सभी सामान की आपूर्ति मांग के अनुपात में काफी कम है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक अप्रैल तक बिहार में 24 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित मिले हैं। एक व्यक्ति की मृत्यु एवं दो ठीक भी हुए हैं। मृतक के संपर्क के कारण 11 लोग कोरोना से प्रभावित हो गये। इस तरह 24 में 12 मामले एक व्यक्ति के कारण फैल गया।
सीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री ने जो निर्णय लिया है। हम उसका अनुपालन कर रहे हैं। कोरोना वायरस की जानकारी मिलते ही लोगों को सचेत किया गया। बीच में कुछ दिन समस्या आयी थी। लॉकडाउन के दौरान दिल्ली से लोगों को भेज दिया गया। बाहर से बिहार आये लोगों को घर पहुंचाने के साथ उनके अलग रहने, भोजन एवं चिकित्सा की व्यवस्था की गई है।
विदेश से भी आये सभी लोगों की जांच हो रही है। होम कोरेंटाइन की व्यवस्था गांव स्तर पर भी की गई है। स्कूलों में आशा वर्कर, आंगनबाड़ी सेविका एवं एएनएम को भी इसमें शामिल किया गया है।
उन्होंने कहा कि तबलीगी जमात के चलते बड़ी समस्या आयी है। जमात के 112 लोगों की सूची हमें मिली है। इनमें बिहार के 12 लोगों को ट्रेस किया गया है। कई बिहार के बाहर ठहरे हुए हैं। 55 लोगों को ट्रेस की कोशिश जारी है। कोरोना मरीजों के इलाज के लिए नालंदा मेडिकल अस्पताल को सुनिश्चित किया गया है।