पटना। बिहार में टिड्डियों (ग्रास हाॅपर) के प्रकोप की आशंका को देखते हुए कृषि विभाग ने अधिकारियों को सतर्क रहने का निर्देश दिया है। किसानों से अपील की गई है कि कहीं से भी इस संबंध में जानकारी मिलने पर तुरंत स्थानीय कृषि अधिकारी को सूचना दें। उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों पर विशेष नजर रखने के लिए कहा गया है।
मूवमेंट की जानकारी देगा यूपी : कृषि मंत्री डाॅ प्रेम कुमार ने बताया कि इस संबंध में यूपी के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही से बात हुई है। टिड्डियों के मूवमेंट की पूरी जानकारी यूपी के कृषि अधिकारी बिहार से साझा करेंगे। बिहार की ओर से इस कार्य के लिए अपर निदेशक धनंजयपति त्रिपाठी को जिम्मेवारी दी गई हैं। टिड्डियों के आक्रमण की स्थिति में उसके नियंत्रण एवं प्रबंधन के लिए विभाग को पूरी तरह से तैयार रहने का निर्देश दिया गया है।

कई राज्यों में मचायी तबाही : पाकिस्तान से चला टिड्डियों का समूह उत्तर प्रदेश में प्रवेश कर चुका है। इससे पहले समूह राजस्थान, पंजाब, हरियाणा एवं गुजरात के कई जिलों में तबाही मचा चुका है। टिड्डी खेत में लगी फसल को बर्बाद करने के साथ लोगों को भी परेशान कर रहे हैं। टिड्डी अपने मार्ग में आने वाले हरे पेड़-पौधे, शाक-सब्जी एवं फसलों को खाकर उन्हें बड़ी क्षति पहुंचाते हैं ।
बचाव के उपाय : स्थानीय स्तर पर समूह बना कर टीन के डब्बों, थाली एवं ढोल बजाकर फसलों को बहुत हद तक टिड्डियों के प्रकोप से बचाया जा सकता है।
यदि फसलों पर टिड्डियों का अधिक प्रकोप नजर आये, तो तुरंत एक लीटर पानी में लैम्बडासायहेलोथ्रीन 5 ईसी की एक एमएल मात्रा या एक लीटर पानी में क्लोरोपायरीफाॅस 20 ईसी की 2.5 से 3 एमएल या प्रति लीटर पानी में फिपरोनिल 5 ईसी की एक एमएल या डेल्टामेंथ्रीन 2.8 ईसी की 1 से 1.5 मि॰ली॰ मात्रा का घोल बनाकर छिड़काव कर सकते हैं। इससे टिड्डियों के प्रकोप से फसलों को बचाया जा सकता है।