नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने प्रवासी श्रमिकों की तकलीफ पर स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेश की सरकारों को आदेश दिया है। कोर्ट ने अंतरिम आदेश में कहा है कि श्रमिकों से ट्रेन एवं बसों का किराया नहीं लिया जायेगा। राज्य सरकार श्रमिकों का किराया देेने के साथ उन्हें घर पहुंचाने की शीघ्र व्यवस्था करेगी।
जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि प्रवासी श्रमिक घर जाने के लिए कई परेशानियों से जूझ रहे हैं। राज्य सरकार भी अपने स्तर से समाधान की कोशिश कर रही है, लेकिन परिवहन और भोजन देने के मामलों में खामियां दिख रही हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि जिस राज्य से प्रवासी श्रमिक चलेंगे, वहां स्टेशन पर उनके भोजन और पानी की व्यवस्था राज्य सरकार करेगी। ऐसी ही व्यवस्था बस में भी करनी होगी। ट्रेन में सफर के दौरान भोजन का प्रबंध रेलवे करेगा।
घर जाने के इंतजार में फंसे श्रमिकों को खाना भी राज्य सरकार ही देगी। भोजन स्थल की सूचना भी देनी होगी, ताकि वे इसका लाभ उठा सकें। उन्हें ट्रेन एवं बसों में चढ़ने के समय की जानकारी भी बतानी होगी। घर जाने के लिए बेचैन प्रवासी श्रमिकों के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में तेजी लाने का आदेश कोर्ट ने दिया है।