पटना। डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी ने कहा है कि 40 साल पुराने श्रम कानून के स्थान पर प्रवासी श्रमिकों के लिए नया कानून बनाने की जरूरत है। लाॅकडाउन के दौरान अगर अंतरराज्यीय प्रवासी मजदूर एक्ट 1979 का कड़ाई से पालन किया गया होता, तो पलायन करने वाले करोड़ों श्रमिकों को फजीहत का सामना नहीं करना पड़ता।
1979 के एक्ट के अनुसार प्रवासी श्रमिकों को घर आने-जाने के लिए रेल किराया देने, अस्वस्थ होने पर इलाज का खर्च, एक व्यक्ति के लिए 6.5 वर्ग मीटर क्षेत्र में आवास, पेयजल एवं शौचालय की व्यवस्था और ठंड में गर्म कपड़ा देने का प्रावधान है। विवाद की स्थिति में नियोक्ताओं को दंडित करने की भी प्रावधान है।
डिप्टी सीएम ने श्रमिकों को नये सिरे से परिभाषित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि श्रमिकों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि, कर्मचारी राज्य बीमा स्कीम, लेबर सेस, अन्य सामाजिक सुरक्षा एवं सभी जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ वन नेशन, वन राशनकार्ड के तर्ज पर देने का प्रावधान होना चाहिए।
राष्ट्रीय स्तर पर प्रवासी श्रमिकों का डाटा बेस तैयार कर प्रत्येक को यूनिक पहचान संख्या देने की भी जरूरत है। वर्तमान कानून में कांट्रैक्टर के माध्यम से एक साथ गये लोगों को ही प्रवासी मजदूर माना गया है, जबकि आज लाखों लोग बिना किसी कांट्रैक्टर के भी अकेले अन्य राज्यों में मजदूरी के लिए जाते हैं।
अगर नियोक्ता एवं उद्योगपतियों ने कानून का कड़ाई से पालन किया होता, तो देश के करोड़ों मजदूरों को पलायन नहीं करना पड़ता। ऐसे में समय की मांग है कि चार दशक पुराने कानून को नये सिरे से अधिनियमित कर उसे कड़ाई से पालन कराया जाये।