पटना। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अधिकारियों को संभावित बाढ़ से बचाव की सारी तैयारी पहले से करने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावितों के लिये आपदा राहत केंद्रों पर सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ख्याल रखना होगा। इस कारण अधिक आपदा राहत केंद्र बनाने के साथ चिकित्सा सुविधा रखनी होगी।
सीएम ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबंधित विभागों के प्रधान सचिव व सचिव, प्रमंडलीय आयुक्त, आईजी, डीआईजी, डीएम एवं एसपी से बाढ़ पूर्व तैयारियों की लगातार पांच घंटे तक समीक्षा की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड-19 के साथ हमें बाढ़ से भी लड़ना पड़ सकता है। दोनों कार्य चुनौतीपूर्ण होगा। सरकार के खजाने पर पहला अधिकार आपदा पीड़ितों का है। खाद्य एवं अन्य राहत सामग्रियों की दर का निर्धारण एवं आपूर्तिकर्ताओं का चयन पहले से कर लें। इसकी जिम्मेवारी सभी प्रमंडलीय आयुक्त की होगी।
बाढ़ के दौरान पशुओं के लिये दवा एवं चारे की उपलब्धता बनी रहे। इसका भी ख्याल रखना होगा। पटना के साथ अन्य शहरों में बेसहारा पशुओं के लिये गौशाला की क्षमता बढ़ाने का भी उन्होंने निर्देश दिया।
सीएम ने कहा कि जलजमाव से निपटने के लिये नगर विकास विभाग सभी नगर निकायों को पर्याप्त आवंटन जारी करे। नगर निकायों में संसाधन की कमी नहीं होनी चाहिये। नेपाल से जुड़ी लंबित योजनाओं को पूरा करने के लिए संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर समाधान करें। पिछले साल पटना में जलजमाव के कारण परेशानी को देखते हुए इस साल विशेष तैयारी रखें।
गंगा से बाढ़ की स्थिति में टाल क्षेत्र एवं सोन नदी से बाढ़ की स्थिति में दियारा के लोगों को बाहर निकालकर उन्हें सुरक्षित रखने के लिए सजग रहना होगा। इसके लिए बाढ़ प्रभावित जिलों में एनडीआरएफ एवं एसडीआरएफ टीम की तैनाती के साथ मुख्यालय में रिजर्व टीम भी रखने का निर्देश दिया गया । बाढ़ के दौरान नाव परिचालन की व्यवस्था भी रखनी होगी।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के निदेशक विवेक सिन्हा ने बताया कि इस वर्ष माॅनसून सामान्य एवं उससे अधिक रहेगा। बैठक में डिप्टी सीएम, कई विभागों के मंत्री, मुख्य सचिव एवं डीजीपी मौजूद थे।