पटना। डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी ने कहा है कि नई औद्योगिक प्रोत्साहन नीति में पहली बार लकड़ी आधारित उद्योगों को प्राथमिकता क्षेत्र में शामिल किया गया है। इससे राज्य के किसानों को बाजार मिलेगा।
2012-13 से 2018-19 के बीच कृषि वानिकी को प्रोत्साहित किया गया। इसके परिणामस्वरूप किसानों ने निजी भूमि पर पांच करोड़ पाॅपुलर सहित अन्य प्रजाति के 8.82 करोड़ पेड़ लगाए हैं। साथ ही बांस की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए दो-दो टिश्यू कल्चर लैब भी स्थापित किए गए हैं। इससे लुगदी व कागज उद्योग, दियासलाई, प्लाईवुड, प्लाईबोर्ड, लेमिनेट व विनीयर, टिम्बर व चिरान तथा बांस आधारित उद्योगों को भी बढ़ावा मिलेगा।
डिप्टी सीएम ने कहा कि कृषि वानिकी का उद्देश्य किसानों की आमदनी में वृद्धि करना है। पिछले 8-10 वर्षों में लगाए गए पेड़ अब परिपक्व हो गए हैं। इन्हें काष्ठ आधारित उद्योगों को बेच कर किसान अच्छी आमदनी प्राप्त कर सकते हैं। राज्य में फर्नीचर, गृह निर्माण, पैकिंग, कृषि सामग्री, खेलकूद के सामान, प्लाईवुड, विनीयर व दियासलाई उद्योग के विकास की असीम संभावनाएं हैं।
कृषि रोड मैप के तहत बिहार में बड़ी संख्या में सागवान, शीशम, महोगनी एवं गम्हार के पेड़ लगाए गए हैं। इन पेड़ों की लकड़ियों का उपयोग जहां इमारत एवं फर्नीचर उद्योग में होता है, वहीं पाॅपुलर से प्लाईवुड, प्लाईबोर्ड व विनीयर आदि बनाए जाते हैं।
नई औद्योगिक प्रोत्साहन नीति में काष्ठ आधारित उद्योगों को शामिल करने से इन्हें बैंक ऋण पर ब्याज अनुदान, वैट की प्रतिपूर्ति, उद्योग के लिए खरीदी गई जमीन की रजिस्ट्री शुल्क का रिम्वर्समेंट, जमीन समपरिवर्तन एवं विद्युत से संबंधित सुविधाओं का लाभ मिलेगा। न्यूनतम 25 लाख या उससे अधिक निवेश करने वाले और 25 या उससे अधिक कामगार वाले काष्ठ आधारित उद्योग इन लाभों को ले सकते हैं।