पटना। नीति आयोग ने बिहार सरकार के कृषि विभाग की सराहना की है। सीईओ अमिताभ कंठ ने ट्वीट किया है कि बिहार में ग्राउंड वाटर लेवल में वृद्धि हुई है। उन्होंने अपने ट्वीट में विशेषकर गया जिले में एक साल में ग्राउंड वाटर में 17 फीट की वृद्धि पर प्रसन्नता जाहिर की है। इस कार्य में कृषि विभाग के भूमि संरक्षण संभाग का काफी योगदान रहा है।
कृषि मंत्री डाॅ प्रेम कुमार ने कहा कि नीति आयोग का यह ट्वीट राज्य के किसान, कृषि विभाग के पदाधिकारी एवं कर्मचारियों के लिए गौरव की बात है।
केंद्र सरकार बिहार के 13 जिलों गया, औरंगाबाद, नवादा, बांका, जमुई, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, बेगूसराय, कटिहार, अररिया, शेखपुरा, पूर्णिया एवं खगड़िया में क्रियान्वित की जा रही योजनाओं की जीआईएस मैपिंग करा रही है। जीआईएस मैपिंग के प्राप्त आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि जल संचय की योजनाओं के प्रति ग्रामीणों का रूझान रहा है और आने वाले दिनों में यह एक गेम चेंजर के रूप में काम करेगा।
कृषि मंत्री ने कहा कि कृषि विभाग के भूमि संरक्षण संभाग की जल संचय संरचनाओं के कारण ही इन जिलों के ग्राउंड वाटर लेवल में वृद्धि हुई है। बिहार के लिए यह बहुत बड़ी बात है। संबंधित जिलों में भूमि संरक्षण की योजनाओं के अंतर्गत वर्ष 2011-12 से अभी तक 4540 जल संचयन तालाब, 1511 प्रक्षेत्र तालाब, 1451 सामुदायिक सिंचाई कूप, 865 निजी बोरवेल, 12 सामुदायिक बोरवेल, 1279 पक्का चेक डैम, 938 साद अवरोध बांध, 4547 आहर का जीर्णोद्धार, 2560 मेड़बंदी, 24 स्टेगर्ड ट्रेंच तथा 492 एकड़ में शुष्क बागवानी की गई है।
इस जल संचयन संरचनाओं के निर्माण से लगभग 1,03,400 हेक्टेयर क्षेत्र में अतिरिक्त सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हो रही है। भूमि संरक्षण संभाग ने लाॅकडाउन के बाद 1.44 लाख से अधिक रोजगार दिवस सृजित किये हैं।