भागलपुर/पटना। बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) सबौर ने देश में कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। 2010 में कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना के बाद से यह कृषि शिक्षा, शोध, प्रसार एवं प्रशिक्षण सहित खेती के सर्वांगीण विकास के लिए संकल्पित है। उक्त बातें कृषि मंत्री डाॅ प्रेम कुमार ने कही। वे बीएयू के स्थापना दिवस पर आयोजित उद्घाटन समारोह को वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के जरिये संबोधित कर रहे थे।
वीडियो काॅन्फ्रेंस में इंटरनेशनल सेंटर ऑफ कीट फिजियोलाॅजी एंड इकोलाॅजी केन्या के प्रधान वैज्ञानिक डाॅ जेड.आर.खान, इंटरनेशनल राइस रिसर्च इंस्टीच्यूट मनीला के मुख्य वैज्ञानिक डाॅ नेन्सी पी. कस्टीला, मलाया यूनिवर्सिटी कुआलालंपुर के प्रधान वैज्ञानिक डाॅ चंद्रन शोभा सुंदर, ब्यूनर्स आयर्स यूनिवर्सिटी अर्जेंटीना के वैज्ञानिक डाॅ फ्रांसीसको सतुआ, फैसलाबाद कृषि यूनिवर्सिटी पाकिस्तान के प्रधान वैज्ञानिक डाॅ अब्दुल रहमान, नेशनल ब्यूरो ऑफ इन्सेक्ट रिर्सोसेज बेंगलुरु के डाॅ सी. बलाल, डाॅ पी. मंजुनाथ, डाॅ दीपा भगत, बीएयू के वीसी डाॅ अजय कुमार सिंह, सभी अध्यापक एवं कर्मी उपस्थित थे।
कृषि मंत्री ने कहा कि कृषि क्षेत्र में विश्वविद्यालय के योगदान को सराहा जा रहा है और कई पुरस्कार मिल रहा है। हाल में देश के प्रतिष्ठित स्काॅच संस्थान ने बीएयू को सूचना तकनीक के माध्यम से किसानों के कौशल उन्नयन को बढ़ावा देने के लिए गोल्ड मेडल दिया गया है।
देश में पहली बार बिहार में किसानों को बीज की ऑनलाईन होम डिलीवरी की व्यवस्था की गई है। इसकी सराहना गृह मंत्रालय ने की है। देश के सभी राज्यों को बिहार माॅडल को अपनाने के लिए निर्देश दिया गया है।यूएनओ ने वर्ष 2020 को अंतरराष्ट्रीय पौधा स्वास्थ्य वर्ष घोषित किया गया है। बिहार के किसानों के परिश्रम से राज्य को कृषि कर्मण अवार्ड से पांचवीं बार सम्मानित किया गया है।