नई दिल्ली/पटना। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत आत्महत्या केस की जांच सीबीआई ही करेगी। महाराष्ट्र पुलिस को केस से संबंधित सभी पेपर सीबीआई को सौंपने होंगे। साथ ही जांच में महाराष्ट्र पुलिस को पूरा सहयोग करना होगा। जस्टिस ऋषिकेश रॉय की एकल पीठ ने 35 पन्ने के आदेश में कहा कि शीर्ष अदालत भी चाहती है कि केस की जांच सीबीआई ही करे। इस मामले में पटना के राजीवनगर थाने में दर्ज एफआईआर बिल्कुल सही है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने खुशी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि यह अन्याय के विरुद्ध न्याय की जीत है। कोर्ट के इस निर्णय से यह पता चलता है कि बिहार पुलिस ने कुछ भी गलत नहीं किया है।
महाराष्ट्र पुलिस से जांच में सहयोग नहीं मिलने पर बिहार सरकार ने चार अगस्त को सुशांत सिंह मामले की जांच सीबीआई से कराने की अनुशंसा केंद्र सरकार से की थी। पांच अगस्त को केंद्र ने सिफारिश स्वीकार कर ली। छह अगस्त को सीबीआई ने रिया चक्रवर्ती समेत छह को अभियुक्त बनाकर दिल्ली में केस दर्ज कर लिया। इधर, अभियुक्त रिया चक्रवर्ती ने केस की जांच सीबीआई से न कराकर महाराष्ट्र पुलिस से कराने की याचिका दायर कर दी।
सुशांत के पिता के.के.सिंह की सहमति के बाद राज्य सरकार ने सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। अभिनेता सुशांत ने 14 जून को मुंबई स्थित अपने आवास पर आत्महत्या की थी। 24 जुलाई तक मुंबई पुलिस जांच में किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी।
घटनाक्रम : घटना से आहत पिता के.के.सिंह ने 25 जुलाई को पटना के राजीवनगर थाने में एफआईआर दर्ज करायी। पटना में एफआईआर के बाद बिहार पुलिस ने 28 जुलाई से केस की जांच शुरू की। पटना पुलिस की स्पेशल टीम मुंबई भेजी गई, लेकिन जांच में मुंबई पुलिस का सहयोग नहीं मिला।
जांच में सहयोग के लिए पुलिस मुख्यालय ने दो अगस्त को पटना के सिटी एसपी विनय तिवारी को मुंबई भेजा। बिहार पुलिस की यह कोशिश भी महाराष्ट्र पुलिस को पसंद नहीं आयी। बीएमसी के अधिकारियों ने आईपीएस अधिकारी को क्वारेंटाइन का हवाला देकर नजरबंद कर दिया। बिहार पुलिस की लगातार कोशिश के बाद सात अगस्त को आईपीएस अधिकारी को क्वारेंटाइन से मुक्त किया गया।