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किसानों से अपील, जलवायु के अनुकूल फसल चक्र अपनाएं  

पटना। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किसानों से कहा कि जलवायु के अनुकूल फसल चक्र अपनाने से उन्हें फायदा होगा। जलवायु के अनुकूल कृषि कार्यक्रम को चार संस्थान बोरलॉग इंस्टीच्यूट फॉर साउथ एशिया पूसा, डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा, बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर एवं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् पूर्वी क्षेत्र पटना के माध्यम से किया जा रहा है। जरूरत होने पर अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से भी सलाह ली जा सकती है। 

मुख्यमंत्री वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के जरिये कृषि विभाग की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने निर्देश दिया कि लोगों को फसल अवशेष प्रबंधन के बारे में जागरूक करें। फसल अवशेष (पराली) जलाने से हो रहे नुकसान की जानकारी लोगों को दें। 

सीएम ने कहा कि गंगा के किनारे 12 जिलों एवं नालंदा में शुरू की गई जैविक खेती से उत्पादन बढ़ा है। जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए लोगों को प्रेरित करें। इससे आमदनी बढ़ने के साथ पर्यावरण संरक्षण भी होगा।

कृषि सचिव एन. सरवन कुमार ने विभाग की ओर से प्रेजेंटेशन में बताया कि पहले फेज में राज्य के आठ जिलों में जलवायु के अनुकूल कृषि कार्यक्रम की शुरुआत की गई है। शेष सभी जिलों में भी इसे शुरू किया जायेगा। राज्य में स्थित चारों संस्थानों से योजना को संचालित किया जा रहा है। उन्होंने किसानों के लिए फसल चक्र, जीरो टीलेज एवं फसल अवशेष प्रबंधन के लिए किये जा रहे कार्यों की जानकारी दी। वीडियो फिल्म के जरिये नालंदा जिले के किसानों की जीरो टीलेज विधि से की जा रही खेती की जानकारी दी।

बैठक में मुख्य सचिव दीपक कुमार, प्रधान सचिव चंचल कुमार, सचिव मनीष कुमार वर्मा, अनुपम कुमार एवं ओएसडी गोपाल सिंह उपस्थित थे। 
 


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