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बिहार की थारू जनजाति सदियों से कर रहे लाॅकडाउन का पालन 

नई दिल्ली। मन की बात में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि बिहार के पश्चिमी चंपारण में सदियों से थारू आदिवासी समाज के लोग 60 घंटे के लाॅकडाउन या उनके ही शब्दों में कहें तो 60 घंटे के बरना का पालन करते हैं। प्रकृति की रक्षा के लिए बरना को थारू समाज ने अपनी परंपरा का हिस्सा बना लिया है। 

इस दौरान न कोई गांव में आता है, न ही कोई अपने घरों से बाहर निकलता है। लोग मानते हैं कि अगर वे बाहर निकले या कोई बाहर से आया, तो उनके आने-जाने से नये पेड़-पौधों को नुकसान हो सकता है। बरना की शुरुआत में भव्य तरीके से आदिवासी समाज के लोग पूजा-पाठ करते हैं। समाप्ति पर आदिवासी परंपरा के गीत, संगीत एवं नृत्य के कार्यक्रम करते हैं। 

प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे पर्व और पर्यावरण दोनों के बीच एक गहरा नाता रहा है। जहां एक ओर हमारे पर्वों में पर्यावरण और प्रकृति के साथ सहजीवन का संदेश छिपा होता है, तो दूसरी ओर कई सारे पर्व प्रकृति की रक्षा के लिए ही मनाए जाते हैं।


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