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राजगीर मॉडल पर जल संचय की संभावना तलाशें : सीएम

पटना । मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि राजगीर के आर्डिनेंस फैक्ट्री परिसर में जल संचयन के लिए बड़ा और सुंदर तालाब का निर्माण कराया गया है। इस मॉडल के आधार पर अन्य जिलों में भी पहाड़ के किनारे जल संचय की संभावनाओं को तलाशना चाहिए। सीएम ने निर्देश दिया कि सौर ऊर्जा के उपयोग, उत्पादन तथा ऊर्जा की बचत के लिए लोगों को प्रेरित करते रहें। इससे पर्यावरण स्वच्छ रहेगा और पैसे की भी बचत होगी। स्ट्रीट लाइट जलाने के लिए सौर ऊर्जा का ही उपयोग करें। इससे वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा मिलेगा।

मुख्यमंत्री वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जल-जीवन-हरियाली अभियान से संबंधित समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान अभियान कीे सूचना प्रबंधन प्रणाली एवं मोबाइल एप्प का भी लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि हर घर नल का जल योजना से लोगों को पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। चापाकल एवं कुओं की उपलब्धता से इस कार्य में और सहूलियत होगी, लेकिन लोग उपलब्ध पेयजल का दुरुपयोग न करें। 

अतिक्रमण मुक्त जल संचयन क्षेत्रों के किनारे बसे गरीब लोगों के पुनर्वास का भी निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि जल-जीवन-हरियाली अभियान के माध्यम से कई कार्य किए जा रहे हैं। इससे लोगों को रोजगार मिल रहा है। सीएम ने आहर, पईन, तालाब, पोखर, कुओं एवं चापाकलों का ब्योरा रखने का निर्देश दिया। खासकर उत्तर बिहार के जिलों में आहर एवं पईन का रिकाॅर्ड एवं सार्वजनिक चापाकल के मेंटेनेंस पर विशेष जोर दिया । 

ग्रामीण विकास विभाग के प्रधान सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने जल-जीवन-हरियाली अभियान से संबंधित कार्यों की जानकारी दी। अभियान के मिशन निदेशक राजीव रौशन ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से रिपोर्ट पेश की। बैठक में डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी, मुख्य सचिव दीपक कुमार, विकास आयुक्त अरुण कुमार सिंह, संबंधित विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव एवं सचिव, सभी प्रमंडलीय आयुक्त एवं डीएम मौजूद थे। 
 


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