पटना। बिहार के बैंकों को आर्थिक पैकेज का लाभ किसान, उद्यमी एवं छोटे कारोबारियों को देने का निर्देश डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी ने दिया है। साथ ही वार्षिक साख योजना की दस प्रतिशत से कम उपलब्धि वाले जिलों से समीक्षा पर भी जोर दिया। दस प्रतिशत से कम उपलब्धि वाले जिलों में बांका (6.29 प्रतिशत), अरवल (6.63 प्रतिशत), मधुबनी (7.68 प्रतिशत) एवं सिवान (8.01 प्रतिशत) हैं।
अधिवेशन भवन में राज्यस्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) की 73 वीं बैठक को डिप्टी सीएम संबोधित कर रहे थे। बैठक में राज्य सरकार के मंत्री प्रेम कुमार, महेश्वर हजारी एवं राणा रणधीर सिंह, एसबीआई एवं विभिन्न बैंकों के वरिष्ठ अधिकारी, वित्त विभाग के प्रधान सचिव एस. सिद्धार्थ एवं कृषि विभाग के सचिव डाॅ एन. सरवण कुमार भी उपस्थित थे।
डिप्टी सीएम ने बैंकों से कहा कि वे बिहार के काष्ठ आधारित उद्योग एवं कृषि व्यवसाय से जुड़े प्रक्षेत्र मखाना, फल, सब्जी, शहद, मक्का एवं बीज प्रसंस्करण को अधिक से अधिक ऋण उपलब्ध कराएं। राज्य सरकार ने इन्हें 15 से 35 प्रतिशत तक पूंजीगत एवं ब्याज अनुदान देने का प्रावधान किया है।
आत्मनिर्भर भारत योजना के अंतर्गत फुटपाथी दुकानदारों को अब तक दिए गए ऋण पर उन्होंने चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बैंकों में आए 14,917 आवेदनों में से 3,974 को स्वीकृत किया गया और मात्र 45 को 10-10 हजार रुपये का ऋण उपलब्ध कराया गया है।
बिहार सरकार ने नगर विकास विभाग के माध्यम से एक लाख फुटपाथी दुकानदारों का आवेदन बैंकों को देने का निर्देश दिया है। किसान क्रेडिट कार्ड के तहत ढाई करोड़ किसानों को दो लाख करोड़ का ऋण देना है, लेकिन बिहार में अभी तक 69,689 किसानों को मात्र 960.85 करोड़ का ऋण स्वीकृत किया गया है।
डेयरी, फिशरी एवं पाॅल्ट्री किसानों के 40,602 आवेदनों में से 7,217 को ही 63.39 करोड़ का ऋण स्वीकृत किया गया है जबकि काॅम्फेड के जरिए बिहार के 12 लाख डेयरी किसानों का आवेदन बैंकों को भेजा जाना है।
कोरोना काल में एमएसएमई प्रक्षेत्र, उद्यमी एवं व्यापारियों को भारत सरकार के तीन लाख करोड़ के बंधन मुक्त ऋण के तहत बिहार के 1,17,713 आवेदकों को 2051.11 करोड़ का ऋण स्वीकृत किया गया है।