पटना/नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मत्स्य एवं पशुपालन और डेयरी मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास किया। योजना के अंतर्गत पटना, पूर्णिया, सीतामढ़ी, मधेपुरा, किशनगंज और समस्तीपुर में कई सुविधाएं शुरू हो जाएंगी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद पहली बार देश में मत्स्य पालन क्षेत्र के लिए इतनी बड़ी योजना की शुरूआत की गई है। अगले 3-4 साल में मछली निर्यात दोगुना करने की योजना है। इससे सिर्फ मछली पालन क्षेत्र में ही रोजगार के लाखों अवसर पैदा होंगे।
कार्यक्रम में राज्यपाल फागू चौहान एवं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भाग लिया। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के शुभारंभ के साथ ही बिहार के लिए केंद्र स्वीकृत मत्स्य विकास परियोजनाओं का भी उद्घाटन किया गया। किसानों के लिए ई-गोपाला एप्प, पूर्णिया में पशु सीमेन केंद्र, बरौनी में आधुनिक नस्ल सुधार तकनीक एवं बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय पटना में आइवीएफ लैब का भी उद्घाटन किया गया।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कई योजनाओं के उद्घाटन एवं शिलान्यास के लिए केंद्र सरकार को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि जो योजनाएं शुरू हो रही हैं उससे बिहार के लोगों को काफी खुशी है। इसका 76 प्रतिशत लोगों की आजीविका पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
पूर्णिया के मरंगा में सीमेन स्टेशन के उद्घाटन होने से बिहार एवं पूर्वोत्तर राज्यों को भी सुविधा होगी। इसके लिए 80 एकड़ जमीन राज्य सरकार ने उपलब्ध करायी है। बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय में भू्रण प्रत्यारोपण तकनीकी प्रयोगशाला के शुरू होने से दूध उत्पादन में वृद्धि होगी और इसका लाभ किसानों को मिलेगा।
सीएम ने कहा कि कृषि रोडमैप के कारण दूध के अलावा मांस और अंडे समेत कई चीजों के उत्पादन में वृद्धि हुई है। अंडे का वार्षिक उत्पादन 106 करोड़ से बढ़कर 274 करोड़ हो गया है। मांस का उत्पादन 1.8 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 3.8 लाख मीट्रिक टन हो गया है। अब राज्य में केवल 65 हजार मीट्रिक टन मछली बाहर से आ रही है। बाकी की पूर्ति राज्य से हो ही है।
उन्होंने कहा कि एग्रीकल्चर और पशुपालन के छात्रों की सुविधा के लिए राज्य सरकार ने कई कदम उठाए हैं। हर छात्र को प्रतिमाह दो हजार एवं छह हजार रुपये किताब खरीदने के लिए दिए जा रहे हैं।