पटना। आईआईटी पटना स्टार्टअप के लिए पूर्वी भारत के इन्क्यूबेशन हब के रूप में विकसित होगा। इसके लिए राज्य सरकार हर संभव मदद करेगी। डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी ने स्टार्टअप से अपील की है कि प्राकृतिक आपदा से मुकाबले के लिए एप्स, साॅफ्टवेयर और इलेक्ट्राॅनिक उपकरणों को विकसित करें। बिहार बाढ़, सूखा, आकाशीय बिजली समेत कुछ बीमारियों से सर्वाधिक प्रभावित है।
डिप्टी सीएम बिहटा स्थित आईआईटी पटना परिसर में निर्मित इन्क्यूबेशन सेंटर भवन का वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग से उदघाटन कर रहे थे। 30 हजार वर्ग फुट में बने इन्क्यूबेशन सेंटर की लागत 47 करोड़ है।
उन्होंने कहा कि मेडिकल, इलेक्ट्राॅनिक्स, डिजायन एंड मैन्युफैक्चिरिंग से जुड़े 40 से अधिक स्टार्टअप को तकनीकी सहायता और प्रत्येक को 10-10 लाख की फंडिंग राज्य सरकार करा रही है। इनमें 20 स्टार्टअप बिहारी हैं। इस सेंटर को अब तक राज्य सरकार की ओर से 25 करोड़ और केंद्र की ओर से 22 करोड़ राशि उपलब्ध करायी गई है। नवनिर्मित भवन में 100 से ज्यादा स्टार्टअप को स्थान उपलब्ध कराया जा सकता है।
अब तक छह स्टार्टअप्स ने अपने सात उत्पादों को बाजार में उतारा है। इनमें स्कूली शिक्षा के लिए रोबोटिक्स, टेलीमेडिसिन प्लेटफाॅर्म, वर्चुअल क्लास रूम एवं कृत्रिम हाथ-पांव प्रमुख हैं। सेंटर के जरिए पांच हजार से अधिक नौजवानों को जागरूकता, स्पर्धा कार्यक्रम, उद्यमिता प्रशिक्षण एवं अन्य अल्पकालीन कार्यक्रमों से जोड़ा गया है। वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग में आईआईटी पटना के निदेशक प्रमोद कुमार जैन, मंत्री नंद किशोर यादव एवं नीरज कुमार मौजूद थे।