पटना। मुजफ्फरपुर और गया में ऑटो को छोड़कर नये डीजल वाहनों के निबंधन पर रोक लग गई है। इन जगहों पर केवल इलेक्ट्रिक वाहनों का ही नया निबंधन होगा। पटना शहरी क्षेत्र में केवल डीजल चालित ऑटो के निबंधन पर रोक लगी है। आद्री एवं अन्य संगठनों ने गया और मुजफ्फरपुर के लिए स्वच्छ हवा कार्ययोजना रिपोर्ट तैयार की है। केंद्र सरकार ने भी पटना, गया और मुजफ्फरपुर को सर्वाधिक वायु प्रदूषित शहरों की सूची में रखा है।
डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी ने रिपोर्ट जारी की। उन्होंने बताया कि हावर्ड यूनिवर्सिटी के एक अध्ययन में पाया गया है कि वायु में पीएम 2.5 कण के एक प्रतिशत बढ़ने पर कोविड संक्रमण का खतरा कई प्रतिशत बढ़ जाता है। इस कारण फेफड़े प्रभावित होते हैं और रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है।
स्वच्छ हवा कार्ययोजना रिपोर्ट में बताया गया है कि गया और मुजफ्फरपुर में परिवहन की वजह से 21 से 23 प्रतिशत, सड़क एवं भवन निर्माण सामग्रियों के परिवहन से 11 से 13 प्रतिशत, फसल अवशेष एवं कचरा जलाने से छह प्रतिशत वायु प्रदूषित होता है। इसी आधार पर डीजल वाहनों के निबंधन पर रोक लगायी गई है।
प्रतिवर्ष नवंबर से मार्च तक वायुमंडल का तापमान कम होने पर वायु प्रदूषण बढ़ने की संभावना रहती है। ऐसे में आने वाले दिनों में कार्य योजना के आधार पर गया और मुजफ्फरपुर में वायु प्रदूषण को कम करने की दिशा में प्रयास किए जायेंगे। इसके अलावा आईआईटी, दिल्ली के सहयोग से पटना में सर्वाधिक वायु प्रदूषण वाले हाॅटस्पाॅट की पहचान की जाएगी।
डिप्टी सीएम ने कहा कि अगले तीन महीने में 30 करोड़ की लागत से 23 जिलों में 24 नये वायु माॅनिटरिंग स्टेशन स्थापित किए जा रहे हैं। फिलहाल पटना में छह, गया और मुजफ्फरपुर में दो-दो, हाजीपुर में एक माॅनिटरिंग स्टेशन वायु गुणवत्ता मापने का कार्य कर रहे हैं। आने वाले दिनों में बिहार में कुल 35 स्टेशन काम करने लगेंगे।
इस मौके पर पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के प्रधान सचिव दीपक कुमार सिंह एवं राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के अध्यक्ष डाॅ ए.के. घोष भी उपस्थित थे।