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इस्पात की खपत बढ़ाने में ग्रामीण भारत की खास भूमिका 

नई दिल्ली। केंद्रीय इस्पात एवं पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि प्रति व्यक्ति इस्पात (स्टील) की खपत बढ़ाना सभी के हित में है। देश में प्रति व्यक्ति इस्पात उपयोग को बढ़ाने में ग्रामीण भारत की अहम भूमिका है। यह क्षेत्र ग्रामीण विकास के साथ रोजगार भी पैदा करेगा।

केंद्रीय मंत्री ‘आत्मनिर्भर भारत : ग्रामीण अर्थव्यवस्था -कृषि, ग्रामीण विकास, पशुपालन और डेयरी खाद्य प्रसंस्करण में स्टील के उपयोग को बढ़ावा देने ‘ पर आयोजित एक वेबिनार को संबोधित कर रहे थे। वेबिनार का आयोजन कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (सीआईआई) के सहयोग से इस्पात मंत्रालय ने किया। इसमें बिहार, यूपी, कर्नाटक और महाराष्ट्र राज्य सरकार के अधिकारी भी शामिल हुए। 

इस्पात मंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में इस्पात की मांग बढ़ाने की अपार संभावनाएं हैं। सरकार एक लाख करोड़ रुपये के एग्रीकल्चर इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड वितरण के साथ कई नए क्षेत्रों को शामिल कर रही है। देश में पांच हजार कम्प्रेस्ड बॉयो गैस संयंत्र विकसित किया जा रहा है। आरबीआई ने हाल में सीबीजी को प्राथमिकता वाले क्षेत्र में शामिल किया है। चावल से इथेनॉल बनाने का काम हो रहा है। सभी के लिए आवास सुनिश्चित करने का मिशन, ग्रामीण सड़क में निवेश, रेलवे की आधारभूत संरचना को उन्नत करने और कृषि को गति देने में इस्पात की बड़ी मांग पैदा होगी। 

वेबिनार को केंद्रीय कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर एवं इस्पात राज्य मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते ने भी संबोधित किया। केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि गांव को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने में इस्पात की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। पिछले कुछ वर्षों में ग्रामीण मांग में बदलाव उत्साहजनक रहा है। बढ़ती ग्रामीण अर्थव्यवस्था इस्पात के अधिक उपयोग के नए अवसर खोल रही है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा, डेयरी, मत्स्य पालन, खाद्य प्रसंस्करण, कृषि उपकरण जैसे अन्य क्षेत्रों में विकास का ग्रामीण क्षेत्रों में इस्पात की खपत पर सकारात्मक असर पड़ेगा। 
 


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