पटना/नई दिल्ली। सेंट्रल ट्रेड यूनियन की 26 नवंबर की राष्ट्रव्यापी हड़ताल में बैंककर्मी भी शामिल होंगे। एसबीआई को छोड़कर सभी व्यावसायिक और ग्रामीण बैंककर्मियों ने हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया है। एसबीआई की कुछ यूनियन ने इसका नैतिक समर्थन किया है। हड़ताल का आह्वान केंद्र सरकार की श्रम विरोधी नीतियों के विरोध में किया गया है।
ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन (एआईबीओए), ऑल इंडिया बैंक इम्पलाइज एसोसिएशन (एआईबीईए), बैंक इम्पलाइज फेडरेशन ऑल इंडिया (बेफी) और यूनाइटेड फोरम ऑफ ग्रामीण बैंक यूनियन ने हड़ताल की सूचना बैंक प्रबंधन को दी है। बैंक यूनियन की मांगों में बैंकों के निजीकरण का प्रस्ताव वापस लेने, आउटसोर्सिंग और कांट्रैक्ट सिस्टम पर रोक, नियमित भर्ती, काॅरपोरेट घरानों से एनपीए की वसूली, जमा राशि पर ब्याज बढ़ाने एवं सर्विस चार्ज में कटौती है।
एआईबीईए ने कहा है कि हाल में संसद ने तीन नए श्रम कानूनों को पारित किया है। कारोबार सुगमता के नाम पर 27 मौजूदा कानूनों को समाप्त कर दिया गया है। ये कानून कॉरपोरेट जगत के हित में हैं। इस प्रक्रिया में 75 प्रतिशत श्रमिकों को श्रम कानून के दायरे से बाहर कर दिया गया है। नए कानून में इन श्रमिकों को किसी तरह का संरक्षण नहीं मिलेगा।