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मौसम के अनुकूल खेती में लागत कम, लाभ अधिक     

पटना। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि मौसम के अनुकूल फसल चक्र अपनाने से किसानों को काफी लाभ होगा। कृषि विभाग ने जलवायु के अनुकूल कृषि कार्यक्रम के अंतर्गत प्रत्येक जिले के 5-5 गांवों का चयन किया है। इससे किसान जागरूक और लाभान्वित होंगे। जलवायु के अनुकूल खेती से किसानों की लागत में कमी आती है और उन्हें अधिक लाभ होता है।

जलवायु के अनुकूल कृषि कार्यक्रम के तहत मुख्यमंत्री 30 जिलों में पहले वर्ष एवं आठ जिलों में दूसरे वर्ष के कार्यक्रम का शुभारंभ कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कृषि रोडमैप की शुरुआत 2008 में हुई। अभी तीसरा कृषि रोडमैप चल रहा है। इससे उत्पादकता बढ़ी है। राज्य में 76 प्रतिशत लोगों की आजीविका का आधार कृषि है। बाढ़ एवं सुखाड़ की स्थिति राज्य में हमेशा बनी रहती है। मौसम के अनुकूल फसल चक्र अपनाना ही इसका समाधान है। 

मुख्यमंत्री ने बताया कि पटना में 2019 में 14 से 15 अक्टूबर को कृषि विशेषज्ञों का पटना में फसल अवशेष पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन हुआ था। इसमें फसल अवशेष के प्रबंधन पर विस्तृत चर्चा हुई थी। फसल अवशेष को जलाने की प्रवृत्ति पंजाब से शुरू हुई। बाद में बिहार के सासाराम एवं कैमूर होते हुए अन्य जिलों तक पहुंच गई।

उन्होंने मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि कृषि विभाग के वरीय अधिकारियों से हवाई सर्वेक्षण कराकर इसका आकलन कराएं। फसल अवशेष को जलाना पर्यावरण के लिए घातक है। किसानों को इसके लिए जागरूक करने की जरूरत है। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस साल धान अधिप्राप्ति का न्यूनतम लक्ष्य 45 लाख मीट्रिक टन रखा गया है। बिहार के जल-जीवन-हरियाली अभियान की चर्चा यूनाइटेड नेशन में भी हुई है। मौसम के अनुकूल कृषि कार्यक्रम को जन-जन तक पहुंचाना है। यह एक स्थायी कार्यक्रम है। फिलहाल पांच वर्ष के लिए राशि आवंटित की गई है। 

कृषि विज्ञान केंद्र भागलपुर, बांका, जहानाबाद, रोहतास एवं सुपौल के कृषि विशेषज्ञों ने जलवायु के अनुकूल कृषि कार्य के साथ नये संयत्रों की जानकारी दी। इन केंद्रों से जुड़े किसानों ने अपने अनुभवों को बताया। कार्यक्रम को डिप्टी सीएम तारकिशोर प्रसाद एवं रेणु देवी, मंत्री विजय कुमार चौधरी एवं अमरेंद्र प्रताप सिंह, कृषि सचिव डॉ एन. सरवन कुमार ने भी संबोधित किया। 

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पूर्व कृषि मंत्री डाॅ प्रेम कुमार, बोरलॉग इंस्टीच्यूट फॉर साउथ एशिया के एमडी अरुण कुमार जोशी, डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के वीसी आर.सी. श्रीवास्तव, बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के वीसी अजय कुमार सिंह, बिल एंड मिलिंडा गेट्स फउंडेशन के प्रतिनिधि कृष्णन, कई कृषि वैज्ञानिक एवं किसान मौजूद थे।
 


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