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अधिकारियों ने जाना फसल अवशेष जलाने की वजह

पटना। फसल अवशेष जलाने की घटना के सही कारणों की जांच के लिए कृषि विभाग ने आज हवाई सर्वेक्षण कर इसका जायजा लिया। अधिकारियों ने पटना, नालंदा, शेखपुरा, नवादा, गया एवं जहानाबाद जिलों का हेलिकाॅप्टर से चार घंटे तक सर्वेक्षण किया। सर्वेक्षण में अधिकतर क्षेत्रों में फसल अवशेष जलाने की घटना को देखा गया। 

सर्वेक्षण के क्रम में नालंदा जिला के किसानों ने बताया कि यहां कृषक मजदूरों की कमी है। इस कारण धान की कटनी समय पर नहीं होने के कारण गेहूं की बुआई समय पर नहीं हो पाती है। ऐसी स्थिति में फसल अवशेष को जलाना पड़ता है। 

अधिकारियों ने किसानों को बताया कि किसी भी परिस्थिति में फसल अवशेष को नहीं जलाना चाहिए। इससे खेत की मिट्टी पर प्रतिकूल असर पड़ता है। कुछ समय बाद उत्पादन कम हो जाता है। किसानों ने आश्वस्त किया कि फसल अवशेष प्रबंधन में सरकार को सभी प्रकार का सहयोग करेंगे। 

हवाई सर्वेक्षण में कृषि सचिव डाॅ एन.सरवण कुमार, सीएम के ओएसडी डाॅ गोपाल सिंह एवं कृषि विभाग के वरीय पदाधिकारी शामिल थे। इस दौरान पटना के दनियावां, बिक्रम एवं मसौढ़ी, नालंदा के गिरियक, बिंद, सरमेरा, राजगीर, हरनौत एवं रहुई, शेखपुरा के बरबीघा एवं काशीचक पहाड़ी, नवादा के वारसलीगंज और गया के मानपुर का हवाई सर्वेक्षण किया गया। 

14 दिसंबर को जलवायु के अनुकूल कृषि कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने फसल अवशेष जलाने की घटना पर चिंता व्यक्त की थी। उन्होंने निर्देश दिया था कि कृषि विभाग के सचिव एवं अन्य अधिकारी हेलिकाॅप्टर से हवाई सर्वेक्षण कर इसके कारणों का पता लगाएं। 
 


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