भागलपुर। कृषि सचिव डाॅ एन. सरवण कुमार ने किसानों से फसल अवशेष का बेहतर प्रबंधन करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि फसल अवशेष को जलाना पर्यावरण के साथ मिट्टी के लिए भी नुकसानदेह है। फसल अवशेष को मिट्टी में मिलाने से उत्पादकता वृद्धि के साथ वर्षा जल का अधिक समय तक संचयन किया जा सकता है।
कृषि सचिव बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर परिसर में फसल अवशेष प्रबंधन पर आयोजित जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने मौसम के अनुकूल कृषि कार्यक्रम के लिए चयनित गांवों के 50 किसानों को कार्यक्रम की महत्ता की जानकारी दी। किसानों से अपने गांव के सभी किसानों को नई तकनीक से खेती करने के लिए प्रोत्साहित करने की भी अपील की।
बीएयू परिसर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में विभिन्न फसलों पर किये जा रहे दीर्घकालीन परीक्षण को कृषि सचिव ने देखा। धान-गेहूं-मूंग फसल पद्धति, आलू-मक्का, मक्का-गेहूं-मूंग, धान-सरसों-मूंग एवं धान-चना फसल पद्धति की सराहना की। इस अवसर पर घर लौटे श्रमिकों को आर्या परियोजना के तहत मुर्गी चूजा, मछली बीज एवं शेड नेट भी दिया गया।
जलवायु के अनुकूल कृषि कार्यक्रम के अंतर्गत सूबे के प्रत्येक जिले के पांच गांवों के किसानों को कृषि की उन्नत तकनीक का प्रशिक्षण दिया जाता है। संबंधित जिले की अनुकूल फसल पद्धति का किसानों के खेतों में प्रयोग कराया जाता है। साथ ही जिले के अन्य किसानों को परिभ्रमण कराकर उनको प्रोत्साहित किया जाता है।
इस मौके पर मुख्यमंत्री के ओएसडी गोपाल सिंह, बीएयू के कुलपति डाॅ अजय कुमार सिंह, डीएम प्रणव कुमार, कृषि उप निदेशक अनिल झा, बीएयू के निदेशक डाॅ आर.के.सोहाने, डीडीसी सुनील कुमार, सहायक निदेशक डाॅ राजेश कुमार, कई कृषि वैज्ञानिक एवं किसान मौजूद थे।