पटना। बिहार देश के सबसे तेजी से विकास करने वाले राज्यों में एक है। राज्य में कृषि क्षेत्र के विकास के लिए नाबार्ड के राज्य फोकस पेपर में सुझाए गए बिन्दुओं पर ध्यान देने और इस क्षेत्र में अधिकाधिक ऋण प्रवाह की जरूरत है। उक्त बातें बिहार सरकार के कृषि मंत्री अमरेंद्र प्रताप सिंह ने कहीं। वे नाबार्ड के राज्य क्रेडिट सेमिनार को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंनेे कहा कि एसएलबीसी के नेतृत्व में बैंकों को अपने प्रदर्शन को और बेहतर बनाने के लिए अधिक प्रयास करना होगा। कृषि मंत्री ने नाबार्ड के राज्य फोकस पेपर 2021-22 को भी जारी किया। इस मौके पर वित्त सचिव देवेश सेहरा, आरबीआई के क्षेत्रीय निदेशक देवेश लाल एवं नाबार्ड के सीजीएम डॉ सुनील कुमार भी उपस्थित थे।
नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक डॉ सुनील कुमार ने कहा कि राज्य फोकस पेपर में राज्य के सभी जिलों के लिए मूल्यांकन किए गए ऋण प्रवाह को संकलित किया गया है। 2021-22 के लिए प्राथमिकता वाले क्षेत्र के अंतर्गत कुल 1,43,618 करोड़ रुपए के ऋण प्रवाह का अनुमान है। संभावित अनुमान आत्मनिर्भर भारत अभियान के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए किया गया है। इस वर्ष के राज्य फोकस पेपर का थीम विषय किसान की आय बढ़ाने के लिए कृषि उपज का संग्रह है।
31 मार्च 2020 की स्थिति के अनुसार 41 प्रतिशत सीडी रेशियो के साथ बिहार न्यूनतम सीडी वाले राज्य में वर्गीकृत है। राज्य के 38 में 28 जिलों को क्रेडिट डिफिशिएंट जिलों के रूप में वर्गीकृत किया गया है। इन जिलों में प्रति व्यक्ति ऋण उपलब्धता छह हजार रुपये से कम है।
ऐसी स्थिति में मुख्य महाप्रबंधक ने बैंकों से कहा है कि वे राज्य फोकस पेपर में कृषि और संबद्ध क्षेत्र के साथ-साथ एमएसएमई और अन्य प्राथमिकता क्षेत्रों में सुझाए गए लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कटिबद्ध रहें। लक्ष्य की प्राप्ति के लिए राज्य सरकार के विभिन्न विभाग, बैंक एवं गैर सरकारी संगठनों के सम्मिलित प्रयास की आवश्यकता है।
आरबीआई के क्षेत्रीय निदेशक देवेश लाल ने राज्य में ऋण प्रवाह बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। सेमिनार में विभिन्न बैंक एवं किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को उनके बेहतर कार्य के लिए सम्मानित किया गया।