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सीएम ने नीति आयोग के समक्ष विकसित बिहार का रखा एजेंडा  

पटना। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित नीति आयोग की छठी गवर्निंग काउंसिल की बैठक में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने कहा कि उद्योगों को बढ़ावा देने का प्रयास बहुत जरूरी है। इसके लिए हमलोगों ने अपनी पॉलिसी बनायी है ताकि राज्य में उद्योग को बढ़ावा मिले। 

उन्होंने कहा कि बिहार एक लैंडलॉक्ड स्टेट है। इस कारण कई तरह की दिक्कत होती है। वर्ष 2011 में ही हमने कहा था कि उड़ीसा में एक अलग बंदरगाह की सुविधा होने से बिहार से किसी चीज को भेजने में सहूलियत होगी। इस प्रस्ताव को हमने पिछले 10 वर्षों में कई बार रखा है।  

बिहार का क्रेडिट डिपाॅजिट रेशियो बहुत ही कम 36.1 प्रतिशत है। यहां से डिपॉजिट 3.75 लाख करोड़ रुपये रहता है, लेकिन बैंकों से 1.35 लाख करोड़ रुपये का ही ऋण दिया जाता है। देश में सीडी रेशियो का औसत 76.5 प्रतिशत है। कुछ राज्यों का तो 100 प्रतिशत है। 

बिहार जैसे राज्यों का जो पैसा बैंकों में जमा होता है। वह विकसित राज्यों में चला जाता है। यहां का पैसा राज्य को ही देने का प्रावधान किया जाये। प्रत्येक पंचायत में बैंक की एक शाखा खोली जाए। इसके लिए पंचायत सरकार भवन की बिल्डिंग देने को तैयार हैं। अगर नीति आयोग पूरे देश में उद्योग को बढ़ावा देना चाहता है, तो इन बुनियादी चीजों पर ध्यान देना होगा। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि मुझे बहुत ही अच्छा लगा कि इथेनॉल के उत्पादन की बात हो गई है। अब गन्ना के रस से भी इथेनॉल का उत्पादन होगा। इथेनॉल के उत्पादन से वैकल्पिक ईंधन मिलेगा। इससे पेट्रॉल और डीजल पर निर्भरता कम होगी और सहूलियत मिलेगी। 

एक बाहर के व्यक्ति ने राज्य में इथेनॉल के उत्पादन के संबंध में लगभग 21 हजार करोड़ रुपये का प्रस्ताव दिया था, लेकिन उस समय की केंद्र सरकार ने अनुमति नहीं दी अन्यथा बिहार में काफी पहले ही इथेनॉल का उत्पादन शुरू हो जाता।  

केंद्र सरकार के कृषि से संबंधित तीनों एक्ट किसान हित में है। हमलोगों ने पैक्स को विकसित किया है। प्रखंड स्तर पर व्यापार मंडल एवं पंचायत स्तर पर पैक्स के माध्यम से बड़े पैमाने पर भी प्रोक्योरमेंट का काम चल रहा है। मौसम के अनुकूल खेती के लिए किसानों को प्रेरित किया जा रहा है।

केंद्र सरकार के प्लांटों के माध्यम से जो अलग-अलग राज्यों में बिजली जाती है। उसका रेट भी अलग-अलग है। इसके लिए एक नीति बननी चाहिए यानि वन नेशन, वन रेट। बिहार को बिजली काफी महंगी मिलती है। इससे लोगों को राज्य सरकार की तरफ से ज्यादा अनुदान देना पड़ता है।  

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत को आत्मनिर्भर देश और बिहार को विकसित राज्य बनाना है। हमलोगों ने विकसित बिहार के लिए सात निश्चय-2 पर काम शुरू कर दिया है। 
 

 


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