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2,18,302 करोड़ का बजट पेश, शिक्षा पर सर्वाधिक खर्च 

पटना। वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए 2 लाख 18 हजार 302 करोड़ रुपये (2,18,302.70 करोड़ ) का बजट बिहार विधानमंडल में पेश किया गया। डिप्टी सीएम सह वित्त मंत्री तारकिशोर प्रसाद ने बजट पेश करते हुए कहा कि राज्य के विकास योजना मद में 1,00,518.86 करोड़ एवं स्थापना और प्रतिबद्ध व्यय मद में 1,17,783.34 करोड़ राशि प्रस्तावित है। 

राजकोषीय घाटा जीएसडीपी का 2.97 प्रतिशत रखा गया है। बजट में किसी नये कर का प्रस्ताव नहीं है। 2021-22 के लिए अनुमानित राशि (2,18,302.70 करोड़) 2020-21 की तुलना में 6541.21 करोड़ अधिक है। 2020-21 में बिहार का बजट 2,11,761.49 करोड़ था। 

2021-22 में प्रमुख विभागों के लिए प्रस्तावित राशि : 

शिक्षा विभाग - 38,035.93 करोड़, 2020-21 की तुलना में आठ प्रतिशत से अधिक की वृद्धि।

कृषि एवं उद्योग - कृषि, सहकारिता, वानिकी एवं संबद्ध सेवाओं के लिए बजट अनुमान 7603.90 करोड़ है। राशि कुल बजट की 3.48 प्रतिशत है। उद्योग एवं खनिज के लिए 1265.45 करोड़ राशि प्रस्तावित है। यह बजट आकार की 0.58 फीसदी है।       

सड़क प्रक्षेत्र - पथ निर्माण एवं ग्रामीण कार्य विभाग के लिए 15227.74 करोड़ राशि प्रस्तावित की गई है। 7850 किलोमीटर ग्रामीण पथ एवं 731 उच्चस्तरीय पुलों के निर्माण का लक्ष्य है। साथ ही आठ हजार किलोमीटर ग्रामीण पथों की मरम्मत एवं उन्नयन कार्य भी होगा। 

स्वास्थ्य विभाग - 13,264 करोड़, 2020-21 की तुलना में 21 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि।

ऊर्जा प्रक्षेत्र - ऊर्जा विभाग के बजट में 2020-21 की तुलना में 53 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि की गई है। 2021-22 के लिए 8560 करोड़ राशि अनुमानित है। 

आत्मनिर्भर बिहार की सात निश्चय-2 योजना - इस योजना के लिए 4671 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। महिलाओं को उच्चतर शिक्षा के लिए प्रोत्साहन स्कीम अंतर्गत 600 करोड़, हर खेत तक सिंचाई का पानी के लिए 550 करोड़, युवा शक्ति के लिए 550 करोड़, पशु एवं मत्स्य संसाधनों के विकास के लिए 500 करोड़, उद्यमिता विकास स्कीम अंतर्गत 400 करोड़ एवं सभी गांवों में सोलर लाइट के लिए 150 करोड़ राशि प्रस्तावित की गई है। 

अनुसूचित जाति- जनजाति, अल्पसंख्यक, पिछड़ा एवं अतिपिछड़ा वर्गों के कल्याण से संबंधित विभागों के लिए 12274.49 करोड़ रुपए अनुमानित है। यह राशि 2020-21 की तुलना में तीन प्रतिशत अधिक है।   

सरकार की आय के श्रोत - बिहार सरकार की आय का सर्वाधिक 41.73 प्रतिशत केंद्रीय करों में राज्यों का हिस्सा से एवं 24.96 प्रतिशत केंद्र सरकार से सहायता अनुदान के रूप में प्राप्त होता है। इसके अलावा राज्य को अपने राजस्व से 16.04 प्रतिशत, लोक ऋण से 14.56, अन्य राजस्व से 2.51 एवं ऋण वसूली से 0.20 प्रतिशत राशि मिलती है। 

कहां खर्च होती है राशि - राज्य सरकार सामाजिक सेवाओं पर सबसे अधिक 41.64 प्रतिशत राशि खर्च करती है। इसके बाद सामान्य सेवाओं पर 27.60 प्रतिशत एवं आर्थिक सेवाओं पर 25.97 प्रतिशत राशि खर्च की जाती है। लोक ऋण की अदायगी पर 4.17, अन्य ऋण पर 0.62 एवं सहायता अनुदान पर 0.01 प्रतिशत व्यय होता है।       


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