पटना। डिजिटल किसान सेवाओं के माध्यम से बिहार में कृषि के भविष्य विषय पर कार्यशाला होटल मोर्या में आयोजित की गई। आयोजन कृषि विभाग एवं बिल-मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
कृषि विभाग के सचिव डाॅ एन. सरवण कुमार ने बताया कि किसानों के लिए डिजिटल प्लेटफाॅर्म तैयार करने का उद्देश्य किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए शीघ्र निर्णय लेना है। साथ ही बेहतर सुझाव देना एवं जलवायु के अनुकूल कृषि कार्यक्रम को क्रियान्वित करने में सहयोग करना है।
वर्तमान में किसान काॅल सेंटर किसानों को एसएमएस के माध्यम से योजनाओं की जानकारी, फसलों में कीट पर नियंत्रण एवं विभिन्न योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराते हैं। ये सारी प्रक्रियाएं एकतरफा होती हैं। इसमें किसी विशेष समस्या का विशिष्ट उपाय हम उपलब्ध नहीं करा पाते हैं। डिजिटल सेवाओं में तकनीक का उपयोग करते हुए कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों से जुड़े सभी किसानों को संपूर्ण समाधान उपलब्ध कराना है।
सचिव ने बताया कि कृषि विभाग के डीबीटी पोर्टल पर अब तक एक करोड़ अड़सठ लाख किसान पंजीकृत हैं। कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं का लाभ सीधे उनके बैंक खाते में भेजा जा रहा है। इसी तरह पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग, सहकारिता एवं जीविका अलग-अलग डिजिटल प्लेटफाॅर्म के माध्यम से किसानों को योजनाओं का लाभ पहुंचा रहे हैं।
कृषि निदेशक आदेश तितरमारे ने कहा कि डिजिटल प्रणाली लागू होने से सरकार की भूमिका सीमित होगी। सरकार केवल नीति निर्धारक के रूप में कार्य करेगी। हमें डिजिटल प्लेटफाॅर्म तैयार करते समय इस तरह से कार्य करना है कि जब हम 5 जी मोबाइल युग में जाएं, तब भी हमारे प्लेटफाॅर्म किसानों के लिए सुलभता से उपलब्ध हो सके।
पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग के निदेशक धर्मेंद्र सिंह ने कहा कि डिजिटल प्लेटफाॅर्म को हमें गतिशील बनाना होगा। इसकी वजह यह है कि हमारे कार्य की समय सीमा कृषि के मुकाबले काफी कम होती है। यहां दूध एवं मछली के लिए बाजार की व्यवस्था निर्धारित समय पर ही करनी होती है।
प्रतिभागियों नेे विभिन्न मंडियों से मूल्य एवं कृषि विपणन बुनियादी ढांचे का डेटा संग्रह के साथ कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग में रुचि रखने वाले किसानों के लिए डिजिटल प्लेटफाॅर्म पर सुविध्ाा उपलब्ध्ा कराने का सुझाव दिय्ाा।
कार्यशाला में बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर के वैज्ञानिक, सहकारिता विभाग, राज्यस्तरीय बैंकर्स समिति, जीविका एवं काॅम्फेड के प्रतिनिधियों ने भी अपने सुझाव दिये।