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किसानों को कम लोन मिलने पर हो सकता है आंदोलन : मंत्री 

पटना। बिहार में किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) एवं कृषि साख योजना की कम प्रगति पर कृषि मंत्री अमरेंद्र प्रताप सिंह ने चिंता व्यक्त की है। उन्होंने बैंक अधिकारियों से कहा कि वित्तीय वर्ष 2020-21 की समाप्ति में अब कुछ दिन रह गये हैं। इसलिए किसानों को अधिक से अधिक ऋण देना चाहिए। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो जनांदोलन की स्थिति में जिम्मेवारी बैंकों की होगी। अगर प्रधानमंत्री से भी गुहार करनी होगी, तो राज्य सरकार ऐसा करेगी। 

पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री मुकेश सहनी ने भी मत्स्य संसाधन क्षेत्र में कम ऋण देने पर रोष व्यक्त किया।  कृषि मंत्री ने राज्यस्तरीय बैंकर्स समिति की समीक्षा बैठक में कहा कि बिहार का साख-जमा अनुपात लगभग 36.1 प्रतिशत है। यह राष्ट्रीय साख-जमा अनुपात 76.5 के आधे से भी कम है। बिहार में केसीसी का लक्ष्य 10 लाख है। इसके विरुद्ध अब तक 16 प्रतिशत यानी 1,70,086 कार्ड ही बना है। इसी तरह राज्य में केसीसी ऋण वितरण की उपलब्धि मात्र 23 प्रतिशत है। 

राज्यस्तरीय बैंकर्स समिति के संयोजक अजीत कुमार मिश्रा के जवाब से कृषि मंत्री संतुष्ट नहीं हुए। उन्होंने कहा कि राज्य में जमा पैसे से बिहार का विकास नहीं होकर दूसरे राज्य का विकास हो रहा है। बैंकों को प्राथमिकता के आधार पर यह तय करना होगा कि योजनाओं का लाभ जरूरतमंद तक अवश्य पहुंचे। इस कार्य में सरकार आपके साथ है।

कृषि, पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग के सचिव डाॅ एन. सरवण कुमार ने कहा कि हर बार बैठक के बाद स्थिति वैसी ही बनी रहती है। बैंक ऑफ बड़ौदा, सेंट्रल बैंक एवं केनरा बैंक ने केसीसी ऋण देने में अच्छा काम किया है, लेकिन एसबीआई एवं पंजाब नेशनल बैंक की कार्यशैली चिंताजनक है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि कार्यप्रणाली में सुधार लाएं नहीं, तो यह मामला उच्च स्तर तक जाएगा। 

कृषि आधारभूत संरचना निधि के अंतर्गत एक भी आवेदक को लाभ नहीं मिला है। कृषि निदेशक आदेश तितरमारे ने बैंकों से कहा कि कम से कम एक ऋण भी स्वीकृत कर इसकी शुरुआत करें। बैठक में मत्स्य निदेशक धर्मेंद्र सिंह, पशुपालन निदेशक विनोद सिंह गुंजियाल, उद्यान निदेशक नंद किशोर, राज्यस्तरीय बैंकर्स समिति एवं नाबार्ड के अधिकारी मौजूद थे।
 


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