पटना। भारतीय कृषि अनंसंधान परिषद (आईसीएआर) के मुख्य वैज्ञानिक डाॅ रंजीत कुमार ने बताया कि बिहार की प्रति व्यक्ति आय कम होने की वजह अर्थव्यवस्था में महिलाओं की क्षमता का सही रूप में उपयोग नहीं करना है। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में विकास की राज्य में असीम संभावनाएं हैं। यदि हम महिलाओं को शिक्षित एवं प्रशिक्षित कर उनकी श्रमशक्ति तथा कौशल का उपयोग करें, तो निश्चित रूप से कृषि क्षेत्र की उत्पादकता बढ़ेगी। इससे हमारी अर्थव्यवस्था को महबूती मिलेगी।
डाॅ रंजीत बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (बीआईए) परिसर में Role of Women's Farmers and Farm Labourers in Strengthening Agricultural & Rural Economy विषय पर आयोजित सेमिनार को संबोधित कर रहे थे। आयोजन बीआईए की वूमेन एम्पावरमेंट सबकमिटी ने किया था।
अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान की सुगंधा मुंशी ने महिला सशक्तिकरण के लिए किए जा रहे विभिन्न कार्यों की चर्चा की। उन्होंने महिलाओं में क्षमता विकास, ज्ञानवर्धन, आजीविका एवं नेतृत्व के लिए सशक्तिकरण पर जोर दिया। विकास प्रबंधन संस्थान की डाॅ राजेश्वरम ने कहा कि कृषि कार्य में महिलाएं पूरा सहयोग दे रही हैं। महिलाओं को प्रशिक्षित कर उनके काम करने की क्षमता को बढ़ाया जा सकता है। वूमेन एम्पावरमेंट सबकमिटी की संध्या सिन्हा ने भी अपने विचारों को रखा।
बीआईए के उपाध्यक्ष ओपी सिंह ने महिलाओं की स्थिति एवं महत्ता पर चर्चा करते हुए कहा कि यदि हमें आर्थिक उन्नति हासिल करनी है, तो महिलाओं को भी सशक्त एवं सजग बनाना होगा। फूल एवं फल की खेती से जुड़ीं दीप्ति राय ने बताया कि उनके कार्य में महिलाओं की भागीदारी अधिक है।