नई दिल्ली/पटना। बिहार में पहली बार चावल एवं गेहूं के भंडारण के लिए कैमूर के मोहनियां और बक्सर के इटाढ़ी में साइलोज (स्टील के बड़े भंडारण टैंक) की स्थापना की जा रही है। इससे भंडारण में खाद्यान्नों की बर्बादी को रोकने में मदद मिलेगी। यह कार्य पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी मोड) में हो रहा है।
राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी के सवाल के जवाब पर खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री पीयूष गोयल ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रत्येक स्थान पर 50 हजार टन क्षमता के साइलोज का निर्माण किया जा रहा है। इसमें गेहूं के लिए 37,500 टन और चावल के लिए 12,500 टन क्षमता शामिल है।
गेहूं के भंडारण के लिए साइलोज का इस्तेमाल देश में पहले से हो रहा है, लेकिन चावल के लिए पहली बार कैमूर और बक्सर में साइलोज का निर्माण किया जा रहा है। अगर यह प्रयोग सफल रहा, तो पूरे देश में 15.10 लाख टन क्षमता के साइलोज का निर्माण कराया जायेगा।
एक साइलोज की अनुमानित लागत 65.28 करोड़ है। अभी बोरे में अनाजों को रखने से चूहे और कीड़े से काफी बर्बादी होती है। साइलोज भंडारण के लिए सुरक्षित है। थाइलैंड, फिलिपिंस एवं बांग्लादेश में साइलोज में ही चावल का भंडारण किया जाता है।