पटना/नई दिल्ली। राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द को कृषि मंत्री अमरेंद्र प्रताप सिंह ने राज्य में कृषि क्षेत्र में लागू योजनाओं की जानकारी दी। राष्ट्रपति भवन में शिष्टाचार मुलाकात के दौरान कृषि क्षेत्र में अब तक बिहार की उपलब्धि एवं भविष्य की योजनाओं से भी राष्ट्रपति को अवगत कराया गया।
कृषि मंत्री ने बताया कि किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) को आधारभूत संरचना के विकास के लिए 90 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। कृषि क्षेत्र में निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए बिहार कृषि निवेश प्रोत्साहन नीति 2020 को स्वीकृति दी गयी है।
इसके तहत राज्य में मखाना, फल एवं सब्जी, शहद, औषधीय एवं सुगंधित पौधे, मक्का, चाय एवं बीज से संबंधित प्रसंस्करण इकाई की स्थापना के लिए अनुदान की व्यवस्था है। व्यक्तिगत निवेशकों को परियोजना लागत का 15 प्रतिशत एवं किसान उत्पादक समूह को 25 प्रतिशत पूंजीगत अनुदान मिलेगा।
राज्य सरकार ने कृषि क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के लिए कृषि रोड मैप लागू किया है। 2017 से 2022 तक के लिए तीसरे कृषि रोड मैप को कार्यान्वित किया जा रहा है। इससे पहले वर्ष 2008 से 2012 तक पहले कृषि रोड मैप एवं 2012-2017 तक दूसरे कृषि रोड मैप का कार्यान्वयन किया गया।
उन्होंने कहा कि राज्य में प्रमुख फसलों का उत्पादन लगभग दोगुना हो चुका है। भारत सरकार ने बिहार को धान, गेहूं एवं मक्का उत्पादन में वृद्धि के लिए पांच कृषि कर्मण पुरस्कार दिया है। यह राज्य के किसानों के अथक परिश्रम से संभव हो सका है। कृषि विभाग के डीबीटी पोर्टल के माध्यम से किसानों के आधार से जुड़े बैंक खाता में सहायता राशि सीधे भेजी जा रही है। दो वर्षों में डीबीटी के माध्यम से किसानों के बैंक खातों में विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत 10699.78 करोड़ राशि भेजी गयी है।
बाढ़ एवं अत्यधिक बारिश से फसलों को काफी नुकसान हुआ। 13.72 लाख किसानों को 567.67 करोड़ राशि कृषि इनपुट अनुदान के रूप में किसानों के बैंक खाते में भेजी गई। कृषि क्षेत्र में डिजिटल तकनीक के उपयोग से 1.68 करोड़ से अधिक किसानों का ऑनलाईन पंजीकरण किया गया है। खाद, बीज एवं कीटनाशी के लाइसेंस की प्रक्रिया को ऑनलाईन किया गया है।
कृषि मंत्री ने राष्ट्रपति को बताया कि विगत वर्षों में जलवायु परिवर्तन के कारण किसानों को नई चुनौतियां का सामना करना पड़ रहा है। ऐसी स्थिति में किसानों को नई तकनीक के माध्यम से प्रशिक्षित करने के लिए राज्य सरकार ने वर्ष 2019 में मौसम के अनुकूल कृषि कार्यक्रम की शुरुआत आठ जिलों से की। उत्साहजनक परिणाम मिलने के बाद 2020 से इस योजना को सभी 38 जिलों में लागू किया जा रहा है।
जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत गंगा के किनारे बसे जिलों में जैविक काॅरिडोर बनाया जा रहा है। सूक्ष्म सिंचाई को बढ़ावा देने के लिए किसानों को 90 प्रतिशत तक अनुदान दी जा रही है। कोविड महामारी के दौरान किसानों के घर तक बीज की होम डिलिवरी की विशेष पहल की गई है।