पटना। कृषि विभाग के उद्यान निदेशालय ने प्रमुख सूक्ष्म सिंचाई कंपनियों के साथ एक वेबिनार का आयोजन किया। वेबिनार का उद्देश्य देश की अग्रणी सूक्ष्म सिंचाई कंपनियों के साथ बिहार में सूक्ष्म सिंचाई आधारित तकनीक के लिए एक अनुकूल वातावरण तैयार करना है। इसकी अध्यक्षता कृषि सचिव डाॅ एन. सरवण कुमार ने की।
वक्ताओं ने कहा कि सूक्ष्म सिंचाई एक ऐसी कारगर विधि साबित हुई है जो जल के उपयोग एवं फसल उत्पादकता को बढ़ाती है। साथ ही किसानों की आय भी बढ़ाती है। बिहार अपनी नदी प्रणाली, बेहतर वर्षा और उपलब्ध भूजल के माध्यम से पानी की प्रचुर आपूर्ति से संपन्न है। इसके बावजूद बढ़ती आबादी एवं अनियमित वर्षा से कृषि क्षेत्र में पानी की उपलब्धता पर एक बड़ा प्रभाव पड़ने की संभावना है। इसका समाधान पानी के सही उपयोग से ही हो सकता है।
निवेशकों ने राज्य में सूक्ष्म सिंचाई प्रोत्साहन के लिए किए गए सकारात्मक परिणामों में अभिरूचि दिखाई। उन्होंने राज्य सरकार के साथ भविष्य में सहयोग के लिए कुछ मुख्य क्षेत्रों की पहचान की है। इनमें समयबद्ध अनुदान, निरंतर समीक्षा प्रणाली, ट्रेसबिलिटी तंत्र को बढ़ाना, स्थानीय स्तर पर सूक्ष्म सिंचाई इकाई की मरम्मत के लिए कुशल श्रमशक्ति की उपलब्धता एवं प्रशिक्षण उपलब्ध कराना शामिल है। निवेशकों ने खेत में तालाब-सौर उर्जा और ड्रिप को एकीकृत कर एक प्रणाली तैयार करने का प्रस्ताव भी दिया। कृषि सचिव ने निवेशकों के सुझावों पर रणनिति तैयार करने का आश्वासन दिया।
उद्यान निदेशक नंद किशोर ने सूक्ष्म सिंचाई के प्रचार के लिए किए जा रहे विभिन्न पहलुओं को बताया। इसके अंतर्गत राज्य सरकार की विभिन्न योजनाएं एवं विभिन्न कार्यक्रम जैसे सात निश्चय-2, जल-जीवन-हरियाली, हर खेत तक सिंचाई का पानी एवं सामुदायिक नलकूप योजना शामिल हैं। इनमें सूक्ष्म सिंचाई को अधिक महत्व दिया गया है।