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मक्का निर्यातक राज्य के रूप में विकसित होगा बिहार

पटना/नई दिल्ली। कृषि मंत्री अमरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि बिहार में मक्का क्षेत्र में असीम संभावनाएं हैं। बिहार सरकार राज्य में मक्का के उत्पादन को बढ़ाने के साथ किसानों को उनकी फसल का अधिक से अधिक मूल्य दिलाने के लिए कार्य कर रही है। सरकार का प्रयास है कि बिहार को मक्का निर्यातक राज्य के रूप में विकसित किया जाए। कृषि मंत्री फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) के इंडिया मेज समिट को वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित कर रहे थे। 

बिहार के कृषि मंत्री ने समिट में उपस्थित केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री पुरुषोत्तम भाई रूपाला से बिहार में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर किसानों से मक्का खरीदने की अपील की। केंद्रीय मंत्री ने आश्वस्त किया कि भारत सरकार इस पर निश्चित रूप से विचार करेगी।

अमरेंद्र प्रताप सिंह ने समिट में उपस्थित सभी उद्योगपति एवं संस्थानों से बिहार में मक्का आधारित उद्योग लगाने की अपील की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बिहार में निवेश के लिए इच्छुक सभी उद्यमियों को हर संभव मदद करेगी। राज्य में कृषि क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहन देने के लिए अलग से बिहार कृषि निवेश प्रोत्साहन नीति लाई है। इसमें पहली बार कैपिटल सब्सिडी का प्रावधान किया गया है। बिहार को इथेनाॅल निर्माण के लिए भी स्वीकृति मिल गयी है।

मक्का दुनिया की सबसे महत्त्वपूर्ण खाद्यान्न फसलों में से एक है और यह अधिकतर विकासशील देशों में खाद्य सुरक्षा में योगदान देता है। चावल और गेहूं के बाद भारत में मक्का तीसरी सबसे महत्वपूर्ण फसल के रूप में उभर रहा है। इसका महत्त्व इस तथ्य में निहित है कि यह न केवल मानव भोजन और पशु आहार के लिए उपयोग किया जाता है, बल्कि मक्का स्टार्च उद्योग, मक्का तेल उत्पादन, बेबीकाॅर्न आदि के लिए भी व्यापक रूप से व्यवहार किया जाता है। 

कृषि मंत्री ने कहा कि तमिलनाडु के बाद बिहार मक्का का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है और यह राज्य रबी मक्का उत्पादन के लिए जाना जाता है। बिहार में वर्ष 2016-17 में मक्का का रिकाॅर्ड उत्पादन दर्ज किया गया। वर्ष 2016 में मक्का के सर्वश्रेष्ठ उत्पादन के लिए भारत सरकार ने कृषि कर्मण पुरस्कार से राज्य को सम्मानित किया गया।

पूर्णियां, कटिहार, भागलपुर, मधेपुरा, सहरसा, खगड़िया और समस्तीपुर मक्का उत्पादक क्षेत्र के रूप में उभरा है। इन जिलों में बड़े और छोटे किसान 50 क्विंटल प्रति एकड़ की दर से मक्का की उत्पादकता प्राप्त कर सकते हैं। बिहार में मक्का के भंडारण के लिए आधारभूत संरचना की कमी है। राज्य में कुल उत्पादित मक्का का मात्र 8 प्रतिशत ही राज्य के अंदर उपयोग हो पाता है और अधिकतर मक्का अन्य राज्यों में कच्चा माल के रूप में चला जाता है। सरकार राज्य के अंदर मक्का आधारित उद्योगों की स्थापना की साथ-साथ आय बढ़ाने के लिए अन्य उपायों पर कार्य कर रही है। 

समिट में नेफेड के प्रबंध निदेशक संजीव कुमार चड्डा, फिक्की नेशनल एग्रीकल्चर कमिटि के चेयरमैन सह टैफे के ग्रुप प्रेसिडेंट टी आर केशवन, फिक्की के महासचिव दिलीप शेनाॅय, बायर क्राॅप साइंस के वाइस प्रेसिडेंट सी.रविशंकर, एनसीडीएक्स के एमडी बिजय कुमार बेंकटरमन, यस बैंक के फूड एंड एग्रीबिजनेस के हेड संजय बुप्पुलरी, कोरटेवा एग्रीसाईंस के निदेशक गुरदीप भठल सहित बड़ी संख्या में देश के जाने-माने उद्योगपति एवं अधिकारी उपस्थित थे। 
 


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