पटना। कोविड-19 महामारी के बीच पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग नेचर क्योर्स यू अभियान चला रहा है। अभियान का मकसद यह है कि कोरोना वायरस को हराने में प्रकृति कैसे मदद कर सकती है। इसके बारे में लोगों को जागरूक करना है। महामारी के इस विकट समय में ऑक्सीजन की कमी नजर आ रही है। ऐसी स्थिति में इनडोर ऑक्सीजन देने वाले पौधे, मसाले और जड़ी-बूटी संक्रमण से बचाने में सहायक होंगे।
विभाग के प्रधान सचिव दीपक कुमार सिंह का कहना है कि पौधे और प्रकृति हमेशा से हमारे प्राचीन आयुर्वेद विज्ञान का आधार रहे हैं। आज भी इनका उपयोग आम बीमारियों के लिए घरेलू उपचार में किया जाता है। गिलोय, कालीमिर्च और पीपली कई बीमारियों से लड़ने में मददगार हैं। ये घरेलू मसाले न केवल आसानी से उपलब्ध हैं, बल्कि सस्ते भी हैं। काढ़ा कई जड़ी-बूटी और मसालों का अनूठा मिश्रण है। यह महामारी के इस दौर में काफी उपयोगी साबित हुआ है।

महामारी ने लोगों को उनके घरों तक सीमित कर दिया है। ऐसे में शुद्ध और ऑक्सीजन युक्त वातावरण एक बड़ी जरूरत बन गई है। स्नेक एवं रबर प्लांट, एरेका पाम कुछ ऐसे इनडोर ऑक्सीजन देनेे वाले पौधे हैं, जो स्वस्थ घरेलू वातावरण के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
काली मिर्च की खेती गर्म आर्द्र उष्णकटिबंधीय जलवायु में घर के बगीचे या घरों में भी की जा सकती है। यह वायरस के खिलाफ रोगाणुरोधी गुण दिखाता है। यह आक्रामक,एनाल्जेसिक, एंटीकॉन्वेलसेंट और न्यूरोप्रोटेक्टिव प्रभाव से पूरी तरह युक्त है।