नई दिल्ली। आगामी खरीफ सीजन के लिए डी अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) खाद की सब्सिडी 140 प्रतिशत बढ़ाने का फैसला केंद्र सरकार ने लिया है। इस निर्णय से किसानों को लाभ होगा। उन्हें पुरानी दर यानी 1200 रुपए प्रति बैग पर ही डीएपी मिलता रहेगा। सरकार इस सब्सिडी के लिए 14,775 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च करेगी। केंद्र सरकार हर साल रासायनिक खाद की सब्सिडी पर करीब 80,000 करोड़ रुपये खर्च करती है।
डीएपी के कच्चे माल फॉस्फोरिक एसिड, अमोनिया एवं सल्फर की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती कीमतों के कारण डीएपी की कीमत बढ़ रही थी। प्रधानमंत्री ने इस मुद्दे पर आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में कहा कि किसानों का कल्याण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसलिए कीमत में वृद्धि के बावजूद किसानों को पुरानी दर पर ही खाद मिलनी चाहिए।
वर्ष 2020 में डीएपी की वास्तविक कीमत 1700 रुपये प्रति बोरी थी। इसमें केंद्र सरकार 500 रुपये प्रति बैग की सब्सिडी दे रही थी। इस कारण कंपनियां किसानों को 1200 रुपये प्रति बोरी के हिसाब से खाद बेच रही थीं।
हाल में खाद में इस्तेमाल होने वाले फॉस्फोरिक एसिड एवं अमोनिया की अंतरराष्ट्रीय कीमत 60 से 70 प्रतिशत तक बढ़ गई। इस कारण एक बैग की वास्तविक कीमत 2400 रुपये हो गई। इसे खाद कंपनियां पहले से जारी पांच सौ रुपये की सब्सिडी घटा कर 1900 रुपये में बेच रही थीं।
केंद्र सरकार के निर्णय से अब किसानों को 1200 रुपये में ही डीएपी का बैग मिलता रहेगा। फॉस्फेटिक और पोटासिक (पीएंडके) उर्वरकों की कीमत नियंत्रण से मुक्त हैं। निर्माता अपने उत्पाद की एमआरपी तय करने के लिए स्वतंत्र है।