नई दिल्ली/पटना। चिपको आंदोलन के प्रणेता एवं प्रख्यात पर्यावरणविद सुंदरलाल बहुगुणा का निधन एम्स, ऋषिकेश में हो गया। 94 वर्षीय सुंदरलाल कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद आठ मई से एम्स में भर्ती थे। एक दिन पहले ऑक्सीजन स्तर में लगातार गिरावट होने से उनकी स्थिति गंभीर बनी हुई थी। वे अपने पीछे पत्नी विमला बहुगुणा एवं तीन बच्चों को छोड़ गए हैं।
हिमालय क्षेत्र के पहाड़ एवं वन की सुरक्षा के लिए सुंदरलाल बहुगुणा लंबे समय तक संघर्ष करते रहे। उन्होंने वृक्षों की कटाई पर रोक के लिए 1974 में चिपको आंदोलन शुरू किया। टिहरी बांध निर्माण का भी उन्होंने कड़ा विरोध किया। उनका मानना था कि बांध निर्माण से पहाड़ का विनाश होता है और यह पर्यावरण के लिए सही नहीं है। वे महात्मा गांधी के पक्के अनुयायी थे। उनका जन्म टिहरी (उत्तराखंड) में हुआ था।
सुंदरलाल बहुगुणा के निधन पर प्रधानमंत्री, बिहार के मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, पर्यावरणविद समेत देश के कई नेताओं ने शोक व्यक्त किया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संदेश में कहा है कि सुंदरलाल बहुगुणाजी का निधन हमारे देश के लिए एक चिरस्मरणीय क्षति है। उन्होंने प्रकृति के साथ सद्भाव में रहने के हमारे सदियों पुराने लोकाचार को सामने लाने का काम किया। उनकी सादगी और करुणा की भावना को कभी भुलाया नहीं जा सकता है। मेरे विचार उनके परिवार और कई प्रशंसकों के साथ हैं। ओम शांति।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने शोक संदेश में कहा है कि सुंदर लाल बहुगुणाजी प्रख्यात पर्यावरणविद् थे। चिपको आंदोलन के कारण वे विश्वभर में वृक्षमित्र के नाम से प्रसिद्ध हुए। भूदान आंदोलन, दलित उत्थान एवं शराब विरोधी आंदोलन में उनकी सक्रिय भूमिका रही थी। उन्होंने कई पुस्तकों की रचना भी की थी। उन्हें कई राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था। उनके निधन से पर्यावरण, साहित्य एवं सामाजिक क्षेत्र में अपूरणीय क्षति हुई है।
उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद ने कहा है कि सुंदरलाल बहुगुणा प्रख्यात् पर्यावरणविद् थे। वे हिमालय क्षेत्र में वन संरक्षण के लिए सक्रिय रहे। इसके लिए उन्होंने चिपको आंदोलन शुरू किया। साथ ही टिहरी डैम परियोजना का विरोध भी किया।