भागलपुर। आईसीएआर के उप महानिदेशक (कृषि विस्तार) डाॅ ए.के.सिंह ने कहा कि बिहार में धान एवं गेहूं की वर्तमान उत्पादकता को बढ़ाने पर विशेष काम करने की जरूरत है। इसके लिए कुछ खास बिन्दुओं को चिन्हित करना होगा। राज्य के बाढ़ग्रस्त जिलों के कृषि विज्ञान केंद्रों से उन्होंने आहवान किया कि कृषि तकनीक का प्रयोग कर किसानों की क्षति को कम किया जा सकता है।
वह बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) सबौर में आयोजित प्रसार शिक्षा परिषद की वर्चुअल बैठक को संबोधित कर रहे थे। उप महानिदेशक ने कहा कि राज्य के उत्पादों को प्रोत्साहित करने एवं राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए राज्य सरकार के साथ समन्वय बनाकर काम करने की जरूरत है। युवाओं के लिए उद्यमिता विकास माॅडल एवं एफ.पी.ओ बनाने पर विशेष बल दिया।

बीएयू के कुलपति डाॅ रविंद्र कुमार सोहाने ने बताया कि जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम के लिए 238 करोड़ रुपए की स्वीकृति राज्य सरकार ने दी है। यह राशि पंचवर्षीय योजना के तहत है। चालू वित्त वर्ष के लिए इससे 71 करोड़ रुपए मिले हैं। पी.एफ.एम.ई. से सब एग्री परियोजना के तहत 15 स्टार्टअप प्रोगाम चलाए जा रहे हैं। कृषि तकनीकों को एस.डी. कार्ड एवं यूट्युब के माध्यम से किसानों को उपलब्ध कराया जा रहा है।
निदेशक प्रसार शिक्षा डाॅ आर.एन.सिंह ने कृषि विज्ञान केंद्रों एवं बीएयू के विभिन्न प्रसार कार्यक्रमों की जानकारी दी। प्रसार शिक्षा परिषद की बैठक में डाॅ अंजनी कुमार, डाॅ आर. के. जाट, डाॅ आर. के. मलिक, डाॅ एस.के.गुप्ता एवं डाॅ ए.पी.राव ने भी अपने विचारों को रखा।