पटना। कृषि मंत्री अमरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि फसलों की उत्पादकता बढ़ाने में कृषि यंत्रों की महत्वपूर्ण भूमिका है। बिहार में बड़ी संख्या में किसान कृषि यंत्रों का उपयोग खेती करने के लिए करते हैं, लेकिन सुदूर क्षेत्रों में मरम्मत नहीं होने के कारण यंत्र अनुपयोगी हो जाते हैं। इस समस्या के निदान के लिए व्यावहारिक प्रशिक्षण शुरू किया गया है। कृषि मंत्री यंत्रों की मरम्मत के लिए आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि 2.32 करोड़ रुपए की लागत से यंत्रों की मरम्मत के लिए श्रमिकों को सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर भागलपुर, पटना एवं समस्तीपुर जिलों का चयन किया गया है। योग्य आवेदक का चयन संबंधित जिला कृषि पदाधिकारी की अध्यक्षता में एक समिति करेगी।
26 दिनों के आवासीय प्रशिक्षण में 675 प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य है। प्रशिक्षण कार्यक्रम राज्य के दोनों कृषि विश्वविद्यालयों एवं कृषि अभियंत्रण कर्मशाला, मीठापुर (पटना) में संचालित किए जाएंगे। प्रशिक्षुओं के रहने एवं भोजन की व्यवस्था निःशुल्क है। प्रत्येक प्रशिक्षु को सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पाने पर 4,200 रुपए का टूल किट भी दिया जाएगा।
कृषि निदेशक आदेश तितरमारे ने योजना की विस्तृत जानकारी दी। इस अवसर पर कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।