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बिजली से घायल पक्षियों को डिहाइड्रेशन से बचाएं 

पटना। पर्यावरण एवं पक्षी संरक्षण की दिशा में काम कर रहे हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा ने घायल पक्षियों के इलाज और संरक्षण विषय पर ऑनलाइन परिचर्चा की। परिचर्चा में भागलपुर एवं बांका वन प्रमंडल के पशु चिकित्सा पदाधिकारी डॉ संजीत कुमार ने कहा कि हम जब भी किसी घायल पशु-पक्षी को देखें, तो सबसे पहले हमें उनका घरेलू उपचार करना चाहिए। 

पानी और चीनी का घोल बनाकर पक्षी को देने से तेजी से सुधार होता है। पॉलिबिन या नेउरोबिओन जैसी सस्ती दवाएं भी दी जा सकती हैं। अगर ब्लीडिंग हो रही हो, तो हल्दी का लेप या फिटकिरी लगाने से खून निकलना बंद हो जाता है। 

डॉ संजीत ने कहा कि अगर किसी जंगली पक्षी का इलाज कर रहे हों, तो इलाज के बाद उसे तुरंत छोड़ देना चाहिए। ऐसा नहीं करने पर जानवर को महसूस होगा कि वह किसी शिकारी की चपेट में आ गया है। ऐसे मे नुकसान हो सकता है। इंटरनेट या विशेषज्ञों के माध्यम से जानकारी प्राप्त करके घायल पशु-पक्षियों को खाना देना चाहिए। उन्होंने कहा कि पशु-पक्षियों के सरंक्षण के तो नियम बने हैं, लेकिन जागरूकता से ही बेहतर समाधान कर सकते हैं। 

गंगा प्रहरी के ज्ञानचंद ज्ञानी ने कहा कि वह अपने परिवार की तीसरी पीढ़ी हैं, जो पर्यावरण और पर्यावरणीय जीवों के संरक्षण में अपना योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर हमें शुद्ध वातावरण चाहिए, तो सबसे पहले पशु-पक्षियों एवं जीव-जंतुओं का संरक्षित करना होगा। हमें जीव-जंतुओं के प्रति संवेदना का भाव रखना होगा। समय के साथ-साथ हमलोग प्रकृति से दूर जा रहे हैं। 

हमारी गौरैया के संयोजक संजय कुमार ने परिचर्चा का संचालन करते हुए कहा कि प्रायः हम सड़क किनारे पक्षी या पशु को घायल अवस्था में देखते हैं, लेकिन हम मदद के लिए नहीं बढ़ते हैं और उनकी मौत हो जाती है। हमें यह समझने होगा कि जीव-जंतुओं और मनुष्यों के बीच परस्पर संबंध हैं। हमारा और उनका जुड़ाव प्रकृति का निर्माण करता है। लिहाजा हमें उनकी देखभाल और सुरक्षा ठीक वैसे ही करनी चाहिए, जैसे हम अपने परिवार की करते हैं।

पर्यावरण योद्धा के अध्यक्ष निशांत रंजन ने कहा कि पक्षी और पर्यावरण के संरक्षण के लिए सबको मिलकर काम करना होगा। परिचर्चा के दौरान पक्षी प्रेमी शुभम कुमार, सोनू कुमार, आकाश दत्त एवं अनिकेत राज ने घायल पक्षियों के उपचार और संरक्षण पर विशेषज्ञों से सवाल पूछे। 

परिचर्चा के दौरान पवन कुमार सिन्हा, तरुण कुमार रंजन, रंजीत कुमार सिंह, राजेंद्र प्रसाद ,जिज्ञासा सिंह, नीतीश चंद्रा, अमित कुमार पांडे, एस रिजवी पंकज कुमार, अरविंद कुमार, हरिलाल प्रसाद, आशीष नेहरा, राजेश राज,  पल्लवी श्रीवास्तव, रवी प्रकाश एवं विमलेंदु सिंह सहित कई गणमान्य लोग जुड़े रहे।
 


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