मुख्य समाचार

धान की फसल को बचाने के लिए कीट पर करें नियंत्रण  

पटना। राज्य के भागलपुर, नालंदा, रोहतास, कैमूर, औरंगाबाद एवं बेगूसराय जिलों में धान की फसल पर शीथ ब्लाइट एवं पत्र अंगमारी जैसी बीमारी के मामले सामने आ रहे हैं। तनाछेदक एवं गंधीबग कीट का प्रभाव भी धान में देखा गया है। कृषि विभाग का कहना है कि अभी रोग और कीट का प्रभाव प्रारंभिक अवस्था में है। सही प्रबंधन से धान फसल को बचाकर पैदावार बढ़ाया जा सकता है। 

जिला कृषि पदाधिकारी एवं पौधा संरक्षण के सहायक निदेशक को निर्देश दिया गया है कि धान में लगने वाले सभी प्रकार के कीट पर नियंत्रण के लिए किसानों को आवश्यक सुझाव दें।  विभाग की ओर से जारी सुझाव -  

-- धान की फसल में शीथ ब्लाइट फफूंद से होने वाला रोग है। इसमें हरे-भूरे रंग के अनियमित आकार के धब्बे बनते हैं। इस रोग पर नियंत्रण के लिए खेत में जल निकासी का उत्तम प्रबंध होना चाहिए। यूरिया का प्रयोग सुधार होने तक बंद रखें। कार्बेंडाजिम 50 प्रतिशत घुलनशील चूर्ण का एक ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर फसल पर छिड़काव करें या वैलिडामाइसीन 3 एल अथवा हेक्साकोनाजोन 5 प्रतिशत का 2 मिली प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करने से बीमारी की रोकथाम हो जाती है।

-- धान में पत्र अंगमारी रोग जीवाणु से होने वाला एक रोग है। इसमें पत्तियां शीर्ष से दोनों किनारे या एक किनारे से सूखती है। देखते-देखते पूरी पत्तियां सूख जाती हैं। इससे फसल को नुकसान पहुंचता है। धान के पौधे में इस रोग के रोकथाम के लिए खेत से पानी निकालने की सलाह दी जाती है। उर्वरक का संतुलित व्यवहार, नेत्रजनीय उर्वरक का कम उपयोग एवं स्ट्रेप्टोसाइक्लिन एक ग्राम प्रति 10 लीटर पानी में घोल बनाकर फसल पर छिड़काव करना चाहिए। एक सप्ताह के बाद दोबारा छिड़काव करना चाहिए।

-- तनाछेदक कीट की पहचान बड़ी आसानी से की जा सकती है। इसके मादा कीट का अगला पंख पीलापन लिए होता है। इसके मध्य भाग में एक काला धब्बा होता है। कीट तना के अंदर घुसकर मुलायम भाग को खाता है। इस कारण गंभा सूख जाता है। बाद में बालियां सफेद हो जाती हैं। 

नियंत्रण के लिए खेत में 8-10 फेरोमोन ट्रैप प्रति हेक्टेयर एवं बर्ड पर्चर लगाने की सलाह दी जाती है। खेत में शाम के समय प्रकाश फंदा, कार्बाफ्यूरान 3 जी दानेदार 25 किलोग्राम या फिप्रोनिल 0.3 जी 20-25 किलो अथवा कार्टाप हाइड्रोक्लोराईड 4 जी दानेदार 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से, खेत में नमी की स्थिति में व्यवहार करें। बिलंब की स्थिति में एसिफेट 75 प्रतिशत एसपी का 1 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर फसल पर छिड़काव करें। 

--  गंधी कीट भूरे रंग का लंबी टांग वाला दुर्गंधयुक्त कीट है। शिशु एवं वयस्क कीट धान के दानों में छेदकर उसका दूध चूस लेते हैं। इससे धान खखरी में बदल जाता है। इस कीट पर नियंत्रण के लिए केकड़ा को सूती कपड़े की पोटली में बांधकर प्रति हेक्टेयर 10-20 जगह खेत के चारों तरफ डंडा के सहारे लटका दें। यह फसल की ऊंचाई से लगभग एक फीट ऊपर हो। साथ ही क्लोरपाईरिफॉस 1.5 प्रतिशत धूल या मालाथियान 5 प्रतिशत धूल का 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से सुबह में छिड़काव कर सकते हैं। 
 


संबंधित खबरें