नई दिल्ली। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) से विकसित विशेष गुणों वाली फसलों की 35 वैरायटी का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकार्पण किया। ये वैरायटी जलवायु परिवर्तन और कुपोषण की चुनौतियों से निपटने में सहायक होंगी। इनमें गेहूं, धान, अरहर, सोयाबीन, सरसों, मक्का, ज्वार, बाजरा, चना, कुटु, किनोवा एवं वाकला शामिल हैं।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कृषि विश्वविद्यालयों को ग्रीन कैंपस अवार्ड वितरित किए। उन्होंने नए तरीके से खेती करने वाले किसानों से बात भी की। प्रधानमंत्री ने कहा कि कृषि से संबंधित चुनौतियों के समाधान के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी का उपयोग हो रहा है। हमारा ध्यान सबसे अधिक पौष्टिक बीजों पर है। ये बदलते मौसम के अनुकूल हैं।
सरकार किसानों की बाजार तक पहुंच, अच्छी गुणवत्ता वाले बीज एवं मृदा स्वास्थ्य कार्ड जैसी कई पहल के माध्यम से किसानों को अच्छी कीमत दिलाने के लिए प्रयास कर रही है। जलवायु परिवर्तन के कारण नए प्रकार के कीट एवं नई बीमारियां आ रही हैं। इससे इंसान और पशुधन के साथ फसलें भी प्रभावित हो रही है। इन पहलुओं पर गहन रिसर्च जरूरी है।
उन्होंने कहा कि जब विज्ञान, सरकार और सोसायटी मिलकर काम करेंगे तो उसके नतीजे और बेहतर आएंगे। किसान और वैज्ञानिकों का गठजोड़ नई चुनौतियों से निपटने में देश की ताकत बढ़ाएगा। किसानों को अब वैल्यू एडिशन और खेती के अन्य विकल्पों के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है।
साइंस और रिसर्च के समाधान से अब मोटे अनाज सहित अन्य अनाजों को और विकसित करना ज़रूरी है। प्रधानमंत्री ने लोगों से कहा कि वे संयुक्त राष्ट्र द्वारा आगामी वर्ष को मिलेट वर्ष घोषित किए जाने के फलस्वरूप उपलब्ध होने वाले अवसरों का उपयोग करने के लिए तैयार रहें।