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आजीवन शराब का सेवन नहीं करने की सीएम ने दिलाई शपथ

पटना। नशा मुक्ति दिवस पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने खुद शपथ लेते हुए उपस्थित लोगों को आजीवन शराब का सेवन नहीं करने की शपथ दिलाई। शपथ में कहा गया कि सत्य निष्ठा के साथ यह शपथ लेता हूं कि मैं आजीवन शराब का सेवन नहीं करूंगा।

मैं कर्तव्य पर उपस्थित रहूं या न रहूं, अपने दैनिक जीवन में भी शराब से संबंधित किसी प्रकार की गतिविधियों में शामिल नहीं होऊंगा। शराबबंदी लागू करने के लिए जो भी विधि सम्मत कार्रवाई अपेक्षित है, उसे करूंगा। यदि शराब से संबंधित किसी भी गतिविधि में शामिल पाया गया, तो नियमानुसार कठोर कार्रवाई का भागीदार बनूंगा।

ज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने मोबाइल पर जनता के नाम एवं सभी नगर निकाय प्रतिनिधियों को भेजे जानेवाले संदेश का अनावरण किया। इससे पहले उन्होंने मद्य निषेध प्रचार-प्रसार वाहनों को भी हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। ज्ञान भवन परिसर में ही नशा मुक्ति पर पेंटिंग, कोलाज एवं टेराकोटा प्रदर्शनी का उद्घाटन और नशा मुक्त परिवार खुशहाल परिवार पर आधारित लघु फिल्म का भी प्रदर्शन किया गया।

मद्य निषेध को लेकर उत्कृष्ट कार्य करने के लिए किशनगंज के एसपी कुमार आशीष समेत पुलिस एवं उत्पाद विभाग के पदाधिकारी एवं कर्मियों को प्रशस्तिपत्र एवं मेडल देकर सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि शराब के सेवन से होने वाली हानि को लेकर डब्ल्यूएचओ ने वर्ष 2016 में एक सर्वे कराया था। इसकी रिपोर्ट वर्ष 2018 में प्रकाशित की गई। रिपोर्ट में कहा गया कि विश्व में होने वाली कुल मौतों में 5.3 प्रतिशत मृत्यु यानि करीब 30 लाख लोगों की मौत शराब पीने से हुई।

शराब के सेवन से होने वाली गंभीर बीमारियों में लीवर की बीमारी 48 प्रतिशत, मुंह कैंसर 26 प्रतिशत, पैंक्रियाज 26 प्रतिशत एवं टीबी की बीमारी 20 प्रतिशत है। डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट में शराब से होने वाले नुकसान से लोगों को सचेत करने के लिए पर्याप्त आंकड़ें हैं। बिहार में शराबबंदी के बाद पर्यटकों की संख्या भी बढ़ी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 9 जुलाई 2015 को पटना के एक कार्यक्रम में महिलाओं ने शराबबंदी की मांग की। मैंने उन्हें कहा यदि अगली बार फिर से काम करने का मौका मिला, तो हम शराबबंदी लागू कर देंगे। सरकार में आने के बाद हमने पांच अप्रैल, 2016 से पूरे बिहार में शराबबंदी लागू कर दी। बिहार में 26 नवंबर, 2011 से मद्य निषेध दिवस मनाना शुरू किया गया और शराबबंदी के बाद 2017 में इसका नाम नशा मुक्ति दिवस कर दिया गया।

कार्यक्रम को डिप्टी सीएम तारकिशोर प्रसाद एवं रेणु देवी, शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी, मद्य निषेध मंत्री सुनील कुमार, मुख्य सचिव त्रिपुरारी शरण, मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक ने भी संबोधित किया।

 

 


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