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रिपोर्ट में बिहार पिछड़ा राज्य, तो मिले विशेष दर्जा : सीएम

पटना। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि नीति आयोग की रिपोर्ट में बिहार पिछड़ा राज्य है। अगर बिहार पीछे है,तो विशेष राज्य का दर्जा मिलना चाहिए। विशेष राज्य का दर्जा मिलने से सबसे बड़ा फायदा होगा कि केंद्र की योजनाओं में केंद्र और राज्य का शेयर 90:10 हो जाएगा। अभी 60:40 या 50:50 है। इससे राज्य का पैसा बचेगा और उस राशि से राज्य का विकास होगा। इससे विकास दर और तेज होगी।

जनता का दरबार कार्यक्रम के बाद पत्रकारों के सवाल में मुख्यमंत्री ने ये बातें कहीं। उन्होंने कहा कि अगर बिहार विकसित नहीं होगा, तो इंडिया कैसे ट्रांसफॉर्म होगा। नीति आयोग का मतलब है नेशनल इंस्टीच्यूशन फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया।

जो राज्य पिछड़ रहें हैं उनके उत्थान के लिए आयोग को काम करना होगा। नीति आयोग की बैठक में हमने कई बातों की चर्चा की है। विशेष राज्य की मांग राज्य हित में है। जिन राज्यों को विशेष राज्य का दर्जा मिला है, उन्हें काफी फायदा हुआ है

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार से पिछड़ेपन को खत्म करने के लिए राज्य सरकार अपने स्तर से कई काम कर रही है। केंद्रीय योजनाओं से भी विकास किए जा रहे हैं। इससे ग्रोथ रेट एवं प्रति व्यक्ति आय बढ़ी है, लेकिन देश की प्रति व्यक्ति आय से बिहार बहुत पीछे है।

वर्ष 2019-20 के आंकड़ों के अनुसार देश की प्रति व्यक्ति आय 1 लाख 34 हजार 432 रूपए और बिहार का 50 हजार 735 रूपए है। वर्ष 2009 की रिपोर्ट के अनुसार राज्य की औसत विकास दर 10.5 थी, जो देश के अन्य राज्यों से अधिक थी। राज्य सरकार का 2004-05 में बजट आकार 23 हजार 885 करोड़ था। 2021-22 में यह 2 लाख 18 हजार करोड़ हो गया है।

उन्होंने कहा कि बिहार के पिछड़ेपन की सबसे बड़ी वजह आबादी है। क्षेत्रफल के हिसाब से बिहार देश में 12वें स्थान पर है, जबकि आबादी के मामले में तीसरे स्थान पर है। क्षेत्रफल की तुलना में जनसंख्या अधिक है।

प्रजनन दर कम करने के लिए राज्य सरकार लोगों को शिक्षित कर रही है। 2005 में प्रजनन दर 4.3 थी। शिक्षा से जुड़ी कई योजनाओं को शुरू करने के बाद 2012-13 में घटकर करीब 3.5 हो गयी। अभी यह तीन पर है। हमें उम्मीद है कि प्रजनन दर घटकर 2 पर आ जाएगी।

 


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