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केंद्र सरकार की नीति का विरोध, बैंकों में लटके ताले

पटना। केंद्र सरकार की बैंक सुधार नीति के विरोध में देश में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के अधिकारी व कर्मचारी मंगलवार को हड़ताल पर रहे। इस कारण सूबे की 6850 शाखाओं में जमा, निकासी, चेक क्लीयरेंस, एनईएफटी और आरटीजीएस लेनदेन प्रभावित रहा। हालांकि निजी बैंकों में बैंकिंग गतिविधियां सामान्य रहीं। हड़ताल यूनाइटेड फोरम आॅफ बैंक यूनियन (यूएफबीयू) के तत्वावधान में हुई। यूएफबीयू बिहार के संयोजक पीडी सिंह ने कहा कि मांगों के प्रति सरकार का सकारात्मक रुख नहीं रहने पर 15 सितंबर को संसद मार्च होगा। यूएफबीयू बैंकिग क्षेत्र के नौ यूनियनों का शीर्ष संगठन है। भारतीय बैंक संघ (आईबीए) ने उपभोक्ताओं को पहले ही जानकारी दी थी कि हड़ताल से शाखाओं में कामकाज प्रभावित हो सकता है।

आॅल इंडिया बैंक आॅफिसर्स एसोसिएशन (एआईबीओए) बिहार के महासचिव डाॅ कुमार अरविंद ने सरकार की नीति को जनविरोधी बताया है। उन्होंने कहा कि आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार बैंकों का एनपीए आठ लाख करोड़ है। मात्र 12 खातों में एनपीए का 25 फीसदी है।   इन खातों पर क्रिमिनल केस होना चाहिए। स्टेट बैंक आॅफ इंडिया आॅफिसर्स एसोसिएशन (एसबीआईओए) पटना सर्किल के अध्यक्ष उमाकांत सिंह ने कहा कि बिहार में एसबीआई की 950 शाखाओं में काम बाधित रहा। स्टेट बैंक आॅफ इंडिया स्टाफ एसोसिएशन (एसबीआईएसए) के महासचिव संजय कुमार सिंह का कहना है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण व काॅरपोरेट ऋण की माफी का प्रयास तथा बैंकों के विलय के विरोध में हड़ताल की गई है। अन्य मांगों में रिक्त पदों पर नई नियुक्ति, पेंशन योजना में सुधार, एनपीएस के स्थान पर पुरानी पेंशन योजना, कॉरपोरेट ऋण के एनपीए को बैलेंस शीट से हटाना और एनपीए की वसूली के लिए संसदीय समिति के सुझावों को लागू करना शामिल है। मौके पर एसबीआईओए के महासचिव घनश्याम प्रसाद श्रीवास्तव, उपमहासचिव अजीत मिश्रा, एसबीआईएसए के विजय कुमार राय व रमेश तिवारी, बेफी के महासचिव उमेश वर्मा  मौजूद थे।  

 


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