पटना। बिहार में बड़े पैमाने पर केले की खेती होती है। देश के फल उत्पादन में केला का हिस्सा 31.72 प्रतिशत है। केला उत्पादक किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए सरकार टिश्यू कल्चर केला पौधे के क्षेत्र विस्तार की योजना चला रही है। वित्तीय वर्ष 2017-18 में इस कार्यक्रम के लिए 2100 हेक्टेयर का लक्ष्य रखा गया है। योजना के अंतर्गत किसानों को खर्च की गई राशि का 50 प्रतिशत अधिकतम 62,500 रुपये प्रति हेक्टेयर अनुदान दो किस्तों में उपलब्ध कराई जाएगी। किसान अपने जिले के सहायक निदेशक,उद्यान से सम्पर्क कर इस योजना का लाभ प्राप्त कर सकते हैं। उक्त जानकारी कृषि मंत्री डाॅ प्रेम कुमार ने दी।
उन्होंने बताया कि केले में कार्बोहाइड्रेट एवं आयरन प्रचूर मात्रा में उपलब्ध रहता है। इसकी खेती धार्मिक के साथ आर्थिक दृष्टिकोण से भी महत्त्वपूर्ण है। इसका औषधीय गुण तथा सुगम उपलब्धता उपभोक्ता समेत उत्पादक एवं व्यापारी वर्ग को आकर्षित करता है। सामान्यतः 100 ग्राम केला फल गुदे से लगभग 67 कैलोरी ऊर्जा मिलती है। केले की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह पूरे साल उपलब्ध रहता है।
डाॅ प्रेम ने कहा कि इसकी खेती किसानों में काफी लोकप्रिय है, लेकिन खेती विस्तार में पौधरोपण सामान की कमी एक समस्या है। इसकी वजह पारंपरिक पद्धति है। इसमें केले की खेती के लिए पौधरोपण सामान की प्राप्ति पुराने केले के पौधे से निकली सकर से की जाती है, जो एक केले के पौधे में अधिकतम 3-4 की संख्या में निकलती है। इसका समाधान कृषि वैज्ञानिकों ने बायो टेक्नोलाॅजी साइंस की मदद से निकाला है। केला पौधे के तना व जड़ के टिश्यू से टिश्यू कल्चर पौधा तैयार किया है। टिश्यू कल्चर केला पौध को खेत में लगाने के समय से 1 वर्ष 10 माह में दो फल सफलतापूर्वक प्राप्त हो जाता है, जिससे समय की बचत होती है। पौधे में किसी प्रकार की बीमारी नहीं होती है, लेकिन जलजमाव वाले क्षेत्रों में ”पनामा बिल्ट“ बीमारी होने की आशंका रहती है। कार्बेन्डाजीम 50 प्रतिशत घुलनशील चूर्ण का 1.5 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करने से बीमारी की रोकथाम होती है।