पटना। मखाना के उत्पादन में बिहार अग्रणी है। देश में मखाना उत्पादन का 80 से 90 प्रतिशत बिहार में होता है। उत्पादक जिले दरभंगा, मधुबनी, सुपौल, सहरसा, पूर्णियां एवं कटिहार हैं। मिथिलांचल के सामाजिक एवं धार्मिक अनुष्ठानों में मखाना का खास महत्व है। यह तालाब व रुके हुए पानी में पैदा होने वाला पौष्टिक एवं प्राकृतिक नगदी फसल है। मखाना उत्पादक किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय बागवानी मिशन एवं मुख्यमंत्री बागवानी मिशन काम कर रहा है। अनुदान का भी प्रावधान है। इसके लिए जिले के उद्यान कार्यालय से संपर्क कर योजना का लाभ ले सकते हैं।
कृषि मंत्री डाॅ प्रेम कुमार ने बताया कि बिहार में मखाना लगाने का आदर्श समय दिसंबर से जनवरी है। मखाना में प्रोटीन 10 से 12 प्रतिशत तथा 328 किलो कैलोरी प्रति 100 ग्राम है। मखाना की पहचान पानी की सतह पर फैले कांटेदार बड़े आकार के गोलाकार पत्र एवं आकर्षक फूलों से की जाती है।
उन्होंने कहा कि राज्य में वित्तीय वर्ष 2017-18 में तालाब प्रणाली के तहत मखाना की खेती 100 हेक्टेयर तथा खेत प्रणाली के तहत 500 हेक्टेयर का लक्ष्य निर्धारित है। तालाब प्रणाली अंतर्गत प्रति हेक्टेयर इकाई लागत 26,800 रुपये का 50 प्रतिशत अधिकतम 13,400 रुपये प्रति हेक्टेयर अनुदान का प्रावधान है। इसी तरह खेत प्रणाली में किसानों को इकाई लागत 32,040 रुपये का 50 प्रतिशत अधिकतम 16,020 रुपये प्रति हेक्टेयर अनुदान मिलेगा।