पटना। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि दहेज प्रथा व बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन से ही बिहार का सही विकास होगा। इसके बिना विकास के लिए किए गए प्रयास अधूरे हैं। बिहार का इतिहास गौरवशाली रहा है। बावजूद यह दुर्दशा है। हमें अपने इतिहास को याद करते हुए गांधी जयंती पर दहेज प्रथा व बाल विवाह के विरोध में संकल्प लेना होगा। अगले साल 21 जनवरी को अभियान के समर्थन में मानव श्रृंखला बनाई जाएगी। उक्त बातें मुख्यमंत्री ने अशोक कन्वेंशन सेंटर के बापू सभागार में बाल विवाह व दहेज विरोधी अभियान के शुभारंभ के दौरान कहीं।
सीएम ने कहा कि बाल विवाह और दहेज प्रथा के मामले में बिहार का स्थान क्रमशः पहला व दूसरा है। महिलाओं पर अपराध में बिहार 26 वें नंबर पर है। दहेज प्रथा के उन्मूलन से महिलाओं पर अपराध में कमी आएगी। 1961 में दहेज प्रथा व 2006 में बाल विवाह के खिलाफ कानून बना हुआ है। दहेज प्रथा के कारण ही बाल विवाह है। बाल विवाह का असर महिलाओं के स्वास्थ्य पर पड़ता है और इसका दूरगामी प्रभाव बच्चे पर दिखता है। इसकी वजह गरीबी, अशिक्षा एवं सामाजिक परंपरा है । इसके लिए उन्होंने सभी लोगों से आगे आने का आह्वान किया। साथ ही उम्मीद जतायी कि शराबबंदी की तरह इसे भी व्यापक जनसमर्थन मिलेगा और एक साल में दोनों कुरीतियों में काफी कमी आएगी। राज्य सरकार नारी सशक्तिकरण की दिशा में कई कार्यक्रम चला रही है। महिलाओं के लिए 50 फीसदी आरक्षण, बालिका पोषाक व साईकिल योजनाएं प्रमुख हैं।
मुख्यमंत्री ने बाल विवाह और दहेज प्रथा उन्मूलन के लिए जागरूकता रथ और कला जत्था को झंडी दिखाई। दोनों राज्य का भ्रमण कर लोगों को इसके कुप्रभावों की जानकारी देंगे।
डिप्टी सीएम : उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि बापू की जयंती पर बाल विवाह और दहेज प्रथा के उन्मूलन के लिए उठाया गया कदम सराहनीय है। वैदिक काल में दोनों कुरीतियां नहीं थीं। गुलामी के दौरान ये पनपीं। कानून से दिल को नहीं बदला जा सकता है। इनके उन्मूलन के लिए हमें संकल्प लेना होगा।
मौके पर स्पीकर विजय कुमार चौधरी, मंत्री मंजू वर्मा, श्रवण कुमार व कृष्णनंदन वर्मा, मुख्य सचिव, डीजीपी व अन्य वरीय पदाधिकारी मौजूद थे।