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छोटे कारोबारियों व ज्वैलर्स को राहत, अब तीन माह में दाखिल करें रिटर्न

नई दिल्ली/एजेंसी। जीएसटी लागू होने के बाद से लगातार आलोचना का शिकार हो रही केंद्र सरकार ने शुक्रवार को दिवाली गिफ्ट दिया। जीएसटी काउंसिल की बैठक के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने जीएसटी के तहत कई तरह की छूटों की घोषणा की। इन छूटों से छोटे कारोबारियों, निर्यातकों और उपभोक्ताओं को काफी राहत मिलने की उम्मीद है। जेटली ने कहा कि कुछ तकनीकी समस्याएं हैं जो धीरे-धीरे खत्म हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि एक अप्रैल 2018 तक सभी एक्सपोर्टर्स का ई-वॉलेट बनाया जाएगा।
पचास हजार से अधिक की ज्वैलरी खरीद पर केवाईसी अनिवार्य नहीं : ज्वैलरी कारोबारियों को बड़ी राहत मिली है। अब 50,000 रुपये से ऊपर की ज्वैलरी खरीद पर केवाईसी नहीं देना होगा। सरकार ने ज्वैलरी खरीद के लिए प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के रोकथाम के प्रावधानों को विस्तार देने वाली अधिसूचना को रद्द कर दिया है। अब ज्वैलर्स को वित्तीय खुफिया इकाई को बायर्स की डेटा रिपोर्ट नहीं देनी होगी। ज्वैलर्स को यह आशंका थी कि ज्वैलरी की खरीद के लिए केवाईसी प्रावधानों के कारण संभावित बिक्री पर असर पड़ सकता है। सरकार ने 23 अगस्त को जैम्स एंड ज्वैलर्स सेक्टर के लिए पीएमएलए के सख्त प्रावधानों को बढ़ा दिया था। आयकर कानून केवाईसी के बिना 2 लाख रुपये तक की नगद बिक्री की अनुमति देता है पीएमएलए के नियम पैन, आधार, ड्राइविंग लाइसेंस या पासपोर्ट की प्रति के बिना किसी भी प्रारूप में बिक्री को 50,000 रुपये तक सीमित कर देते हैं।
डेढ़ करोड़ तक के टर्नओवर वाले अब तीन महीने में भरेंगे रिटर्न : वित्त मंत्री ने कहा कि जीएसटी के तहत अबतक के टैक्स कलेक्शन से पता चला है कि बड़ा हिस्सा बड़े कारोबारियों से आ रहा है। हालांकि जीएसटी सिस्टम में मंझोले और छोटे कारोबारियों की संख्या भी काफी है। ऐसे में उन्हें जीएसटी की जटिलताओं से परेशान होना पड़ रहा है। उन्हें राहत देते हुए डेढ़ करोड़ तक के टर्नओवर वाले कारोबारियों को भी तीन महीने पर रिटर्न दाखिल करने की छूट देने का फैसला हुआ है। जेटली ने कहा कि इससे करीब 90 फीसदी टैक्स पेयर्स को राहत मिलेगी। 
अब ये चीजें होंगी सस्ती: जीएसटी काउंसिल ने कई वस्तुओं और सेवाओं पर टैक्स घटा दिया है। ऐसी करीब 27 चीजें हैं जिनपर राहत मिल गई है। स्लाइ्स ड्राइड मैंगो पर जीएसटी 12 से 5 फीसदी, खाखड़ा व प्लेन चपाती पर 12 से 5, बच्चों के पैकेज्ड फूड पर 12 से 5, अनब्रैंडेड नमकीन पर 12 से 5, अनब्रैंडेड आयुर्वेदिक दवाओं पर जीएसटी 12 से 5 फीसदी कर दी गई है। इसके अलावा प्लास्टिक, रबर वेस्ट पर जीएसटी 18 से 5 फीसदी जबकि पेपर वेस्ट पर 12 से 5 फीसदी कर दी गई है। मार्बल और ग्रेनाइट को छोड़कर दूसरे स्टोन, स्टेशनरी, डीजल इंजन के पार्ट्स पर जीएसटी 28 से 18 फीसदी कर दी गई है। ई वेस्ट पर जीएसटी 28 से 5 फीसदी कर दी गई है। सर्विसेज में जरी के काम और आर्टिफिशल ज्वैलरी पर जीएसटी 12 से 5 फीसदी कर दी गई है। 
एक्सपोर्टर्स का फंसा पैसा मिलेगा : वित्त मंत्री ने कहा कि जीएसटी परिषद में एक्सपोर्टर्स की समस्या पर विचार हुआ। जीएसटी लगने की वजह से एक्सपोटर्स का क्रेडिट काफी ब्लॉक हो रखा है, जिसका असर उनकी कैश लिक्विडिटी पर पड़ा है। जेटली ने कहा कि इसका डेटा तो उपलब्ध है लेकिन तुरंत रीपेमेंट व्यवस्था धीरे-धीरे बन रही है। उसमें थोड़ा समय लगेगा। ऐसे में तय हुआ है कि 10 अक्टूबर से जुलाई का और 18 अक्टूबर से अगस्त का रीफंड प्रोसेस करके एक्सपोटर्स को चेक से भुगतान कर दिया जाएगा। यह केवल अंतरिम व्यवस्था होगी। 
कंपोजिशन स्कीम का दायरा एक करोड़ हुआ : वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मंझोले और छोटे कारोबारियों को राहत देते हुए कंपोजिशन स्कीम का दायरा बढ़ा दिया है। इस स्कीम में पहले 75 लाख के टर्नओवर वाले कारोबारी थे। अब इसे बढ़ाकर इसमें एक करोड़ तक के टर्नओवर वालों को भी शामिल कर लिया गया है। जीएसटी के तहत इस स्कीम में तीन प्रकार के लोग आते हैं। पहला ट्रेडर्स जो एक फीसदी टैक्स देंगे, दूसरा मैन्युफैक्चरर्स जो दो फीसदी टैक्स देंगे और तीसरा रेस्तरां बिजनस वाले, जिन्हें 5 फीसदी टैक्स देना पड़ेगा। अब दायरा बढ़ जाने से तीनों तरह के कारोबारियों को राहत मिलेगी। सर्विसेज को इस स्कीम में शामिल नहीं किया गया है।
 


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